होटल ताज महल पैलेस | Hotel Taj Mahal Palace


आज हम बात करने जा रहे हैं बेमिसाल खूबसूरत और भारत की इतिहास को बताती हुई इमारत होटल ताज (ताजमहल पैलेस) के बारे में।

खूबसूरती और देशभक्ति की मिसाल पेश करता हुआ मुंबई का ताज पैलेस, किसी परिचय का मोहताज नहीं है। अरब सागर की ऊंची-ऊंची उठने वाली लहरों से तर होने वाली यह इमारत मुंबई की सर का ताज कहलाती हैं। यह ताज होटल देश के ट्रेडमार्क इमारत हैं।

१६ दिसंबर १९०३ में टाटा ग्रुप के फाउंडर जमशेदजी टाटा ने मुंबई में ताज महल पैलेस को बनाया था। जमशेदजी टाटा उद्योग जगत के लिए हमेशा से प्रेरणा का स्त्रोत रहे। मार्च १८३९ को जन्मे जमशेद जी ने १४ वर्ष की उम्र में ही अपने पिता नौशेरवांजी जी का व्यवसाय में हाथ बढ़ाना शुरू किया और २९ वर्ष की आयु तक भी पूरी तरह अपने पिता के व्यवसाय से जुड़ गए।

जमशेद जी के जीवन काल में एक ऐसा दौर भी आया, जब भी पूरी तरह आर्थिक संकटों से घिर गए और उन्हें अपना मकान और जमीन-जायदाद भी बेचनी पड़ी। पर अंततः जमशेद जी ने हिम्मत न हारते हुए उन सारे संकटों का सामना किया और इस तरह उन्होंने उद्योग जगत में बहुत नाम कमाया। होटल ताज पैलेस उनका Dream Project था, जिसे वे अपने जीवनकाल में पूरा करना चाहते थे और पूरा किया भी ।४ करोड़ २१ लाख रुपए की शाही रकम से तैयार इस विश्व प्रसिद्ध इमारत के निर्माण के पीछे एक रोचक कहानी छिपी हुई है।


कहा जाता है कि उस दौर में जब देश में अंग्रेजों का राज्य था, तब उस जमाने के जाने-माने लुमियर  ब्रदर (Lumiere Brother) जिन्हें सिनेमा का जनक भी कहा जाता है, उन्होंने अपनी पहली फिल्म का शो मुंबई के वाटसन होटल में आयोजित किया। जिसे देखने के लिए बड़ी-बड़ी हस्तियां शामिल हुई थी। जुलाई १८९६ को टाटा जमशेद जी वाटसन होटल ग्रैंड गए जहां दुर्भाग्यवश उन्हें रंगभेद का शिकार होना पड़ा और उन्हें होटल के बाहर लगी हुई तख्ती दिखा दी गई, जिसमें लिखा था Dogs & Indians are not allowed (भारतीय और कुत्तों का आना मना है)

बस फिर क्या यही मौका था जमशेद जी के ड्रीम प्रोजेक्ट को पूरा करने का। उसी दिन जमशेद जी ने तय किया कि वह भारतीयों को इससे भी अच्छा खूबसूरत और आलीशान होटल बना कर देंगे |

1903 में मुंबई के समुद्र तट में आलीशान ताज पैलेस बनवाया गया । चूंकि उस दौर में बड़ी-बड़ी होटलों में भारतीयों को आने की अनुमति नहीं थी, इसीलिए टाटा ने एक ऐसी होटल का निर्माण कराया जहां भारतीय भी एक विश्व स्तरीय होटल में प्रवेश कर सकें और इसीलिए इस होटल के बाहर तख्ती लगाई गई Cats & British are not allowed.

उस समय यह होटल बाकी होटलों से बेहतर था जो आज भी भारत की धरोहर हैं।

बदलते वक्त के साथ भारत की इस धरोहर ने एक दर्द भी झेला। 26 /11 का वह हमला जिसमें आतंकियों ने देश की धरोहर के दिल को छलनी-छलनी कर दिया। जिसे आज भी एक बुरे सपने की तरह याद किया जाता है

लेकिन जो फिर से गिरकर खड़ा ना हो सके वह ताज क्या। और तमाम मुश्किलों के बाद भी ताज बड़े शान से खड़ा है और देश का नाम बढ़ा रहे हैं।         

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