बड़ी तीज | भादों तीज | कजरी तीज | सातुड़ी तीज


Badi Teej | Bhado Teej | Kajri Teej | Satudi Teej



बड़ी तीज कब मनाई जाती है

Badi Teej Kab Manae Jaati Hai | Badi Teej Kab Manaya Jata Hai


भादव बदी दूज न सिंजोरा आवे। परण्योडी और कुंवारी सगली माथो न्हावे, मेंहदी मांडे, पुष्प की लेणी लगाके घर में मीठो बनाके, जीम । नया कपड़ा पेर, चिरमियां खेल, झुला झूले और गीत गावें । भादवा बदी तीज “बडी तीज” कहलावे ।

बी दिन सुवागण लुगायां और कंवारी छोरयां निगोठ बरत करे । शाम की टेम नीमड़ी माता की पूजा करे । कहाणी केव सुण । दिनुगै सुवागण लुगायां सातु का पिन्डा सू कप्पणो कलप कर घर की सबसे बड़ी लुगाई न पगां लाग कर देव । शाम की टेम पर पूजा हुयां पछ रात का चन्द्रमाजी दिख्या पछ चन्द्रमाजी की पूजा कर अरग देवे पछे मोटयार सातु पासे । और पछे आकडा का पत्ता का दोणा बनार बेंम सुं जल पीवे । और जीमे ।



बड़ी तीज पुजा विधि

Badi Teej Pooja Vidhi | Satudi Teej Puja Vidhi


नीमड़ी की पूजा को सामान :- कुंकु, चांवल, हल्दी, मोली कच्चो दूध, पुष्प माला, कसुमली कपडो, नींबू, खीरा, काकडी, सातु को लाडू, मोली, सुपारी, खजूर, दीपक, अगर बत्ती ।

शाम की टेम नीमड़ी माता की पूजा करे । कहाणी केव सुण । दिनुगै सुवागण लुगायां सातु का पिन्डा सू कप्पणो कलप कर घर की सबसे बड़ी लुगाई न पगां लाग कर देव । शाम की टेम पर पूजा हुयां पछ रात का चन्द्रमाजी दिख्या पछ चन्द्रमाजी की पूजा कर अरग देवे पछे मोटयार सातु पासे । और पछे आकडा का पत्ता का दोणा बनार बेंम सुं जल पीवे । और जीमे ।




बड़ी तीज को उजेवणो | बड़ी तीज का उद्यापन

सातुड़ी तीज का उद्यापन | कजरी तीज का उद्यापन


बड़ी तीज को उजेवणो करे जणा सोलां (१६) सवागण लुगायां क वास्ते सव्वा पाव या सव्वा सेर को सातु को पिंडो बनावे,और बेंक घर भेज सागे शक्ति सारु भेट, भी भेजे । एक पीन्डो और भेंट साखीधर की होवे ।




बड़ी तीज की कहानी

Badi Teej Ki Kahani


एक साहुकार हो बींक सात बेटा हा । छ बवां के पीर सुं तीज तीवार पर मिठाइयां आवती कपड़ा लत्ता आवतां सातवी बहु क पीर म कोई भी कोनी हो बिंक वास्ते बींक की भी कोना आवतो । दिवर जिठाण्या मोसा मारती ।

एक बार बड़ी तीज पर छ बवां क पीर सुं सातु की आसरयां ओर लाडू आया, कपड़ा, साडियां आई । ब सगली बवां सातवीं न दिखार मोसा मारण लागी। जणा बा बहुत उदास होयगी, मन में सोची आज म्हारा पीर म कोई भी होवतां तो म्हारे भी ये सगली चीजों आवती । ओ देख कर बी को धणी कहयो तू चिंता मत कर म्हे थारे वास्ते सातु और साड़ी लाऊ ।

बो बाजार गयो बठ एक महाजन आपकी दुकान मंगल कर हो बो छाने सुं दुकान म घुसगयो । थोडी रात हुया पछ ओ जाण कर भी महाजन सोयगयो हुयी बो फुटाना भी दाल पिस्यो, शक्कर पीसी घी लेर एक सातु बनायो । दूकान म खडबड भी आवाज सुन लोग महाजन न जार जगाया और कहयो की थारी दुकान म चोर घुसगयो । महाजन भाग्यो भाग्यो आयो ओर दुकान का ताला खोल्यो ।

महाजन आडो खोलर देखे तो बठ एक बाण्या को बेटो एक सातु को पिंडों, चार लाडू एक सींक चुंदडी की साडी बांधर बेठ्यो हो । महाजन पूछयो तू कूण ह ? बो बोल्यो म्हे चोर कोणी।‌ म्हारी लुगाई क पीर कोनी । बीक वास्त म्हे सातू को पिंडों और‌ चुंदडी की साडी लेजा रहयो हूं । म्हारी भोजायां क पीर सुं यान को सगलो खूब आयो म्हारी लुगाई क पीर नहीं रेवण सूं की भी कोनी आवो इण वास्ते बीन बहुत अणस आरहयो है । म आचोरी करन आयो । जणा बो महाजन बोल्यो थे अब घर जाओ आज सुं थाकी लुगाई म्हाकी धरम की बेटी है, म्हे बीका मां, बाप हां, म्हे ओ सगलो सामान थांके घर पुगा देऊं ।

जणा पछ सुं कोई कारण सुं कोई क पीर को नहीं आहे तो सुगन वास्ते घर को बणा लेनो । हे तीज माता बीन पीर वासो दिसो जिस्यो सबन देईजे ।




बड़ी तीज की कथा

Badi Teej Ki Katha


एक साहुकार हो बींक चार बेटा हा । तीन तो कमाऊ हा घण चौथोडो की कमावतो कोनी । सारा दिन एक वैश्या के घर पडयो रेंवतो । जण कणाई सेक रुपया पैसां की जरुरत पडती जणा आांवतो। बींकी लुगाई आपके सासरा क घर को सांरो काम करती। बीकी दिवर-जिठान्या बींपर दिन भर हुक्म छोडती रेवती बा हर एक न्यारा न्यारा तोक राखती । बडी तीज को तिवार आयो । घर का सगला काम सुं निवड कर बा पूजा करण न बैठी,

वित्तां म ही बिंको धणी आयो और आवाज दी "बार बार खोल किवाड"। बा आडो खोली, खोल्ता पाण ही बो नशा म चूर धणी पाछो केवण लाग्यो म्हेन वैश्या क घर पाछो पूगा । बा बीनं गोदयां भरर पुगार आयी । वाछी चिराग जोर पूजा करण बेठी ही कि फेर बींको धणी आयो फेर दरबाजो खोलण आवाज दी । बा पूजा करती उठी दरवाजो खोला दरवाजो खोलतां ही बो पाछो पुगावन को कहयो । जणा फेर बा पूगा आयी । यान बा पुगा कर आर पूजा न बेठ और बो पाछो । ओर किवाड खुलवा खुलवा पाछो पुगावन को केवे यान छः बार होयगी । सातवीं बार जणा बींको धणी पाछो आर पाछो पुगावन गयी जणा जांवती बेल्यां बा हाथ जोड तीज माता न कही हे तीज माता म्हार करमां म ओ कांई लिखयोडो है ।

आंवती टेम का आकाशवाणी हुवे आंवती जांवती देणो खोल कर पीजे । बठ और तो की कोणी हो एक आकडा को झाड हो बा बिका पत्ता तोडी और दोणो बनार नदी म सुं पानी लेर पी लियो । घर आयी और पूजा करण न बेठी । बठीन तीज माता बींक धणी की बुद्धी न चेतायी । जणा बो बी वैश्या सुं आपको दियोडो धन गेहणा पाछो लीयो और घर बीर हुयो। आंवती टेम नदी म स्नान करयो स्नान करता ही बीं की देह एक दम कचन जिसी होयगी ।

घर आयो फेर आवाज दी बार बार खोल किवाड। मायन सु लुगाई कही चन्द्रमाजी माथे आय गया अब तो म्हने पूजा करण दो । जणा बो फेर आवाज दियो । बा सेवर उठ आडो खोली । आडो खोल खोल देखतो बींक धणी की काया कंचन जिशी होयगी । बो पाछो सगलो धन लेर आयो हो आपकी लुगाई न सौंप दियो । जणा बे दोणु सागे जोडा सुं पूजा करी पिडा पास्यो ।




तीज माता की कहानी

Teej Mata Ki Kahani | Badi Teej Mata Ki Kahani


एक साहुकार हो बींक बेटो कोनी हो । बोंकी लुगाई माता की बोलवां करी कि म्हार बेटो हुई तो सव्वा मण सातू को बींक भोग लगाऊं । बींक सात बेटा हुया । खुशी सूं बोलवा पूरी करणू भूलगी । बेटा समय सार बडा हुआ। पहला बेटा को ब्याव करयो। बेटो बहु देवता धोकण मन्दिर गया बेटो गन्जोडा समेंत गायब होयग्यो ।

चारु कोनी घणो ढूंढया पण कोनी मिल्यो । जणा घर वाला बहु म लेर गया परा । यान करतां करतां छः बेटा परणीज्या ओर देवी देवता धोकण मन्दिर जाता बेटा गन्जोडा सहित गायब हो जांवतो छः बवा घर म बेठी ही। साहुकार और सेठानी घणा दुःखी हो । घणो जतन करयो कोई उपाय कोनी हुयो । सातवों बेटो भी ब्याव मान हुओ जणा सासुचेती साहुकार दूर देशां की बहु लाऊं सोंच्यो । एक ब्राह्मण न मारग म खर्चा सारु रुपया, खावण को सामान देर बहु ढूंढन भेज्यो। ब्राह्मण फिरतो फिरतो एक देश म पूग्यो ।अठ देख ह चार छोरियां मिट्टी सुं आपका घर बनाव ही । खेल खेल म तीन छोरियां तो आपका बनयोडा मिट्टी का घर पाछा बिखेर दिया चौथी छोरी यान ही छोड दी । बींन पूछयो जणा कहयो म्ह मांडयोडा घर कोनी उजाडू । ब्राह्मण न बींम घणा चोखा लक्षण दिख्या बो पतो लगार बींक घर गयो और बींका बाप सूं साहुकार क लडका क सागे बीं छोरी की सगाई की बात चलायी ।

छोरी गरीब घर की ही । साहुकार के बारा म सगली हकी कत पूछी और छोरी को, बाप ब्राह्मण सुं कहयो इतना दूर देश म्हारी बेटी न परणाऊं पण म्हारी छोरी खुशी रेवणी। ब्राह्मण बिन हर प्रकार सुं संतुष्ट कर दियो । सगाई होयगी । चोखो मोहरत देखकर व्याव भी कर दियो । विदाई की टेम साहुकार कहयो हाल म्हे बहु, न घर कोनी ले जाऊं चोखो मोहरत देखकर ले जाऊं थोडा दिन थांके अठे ही राखो। चोखा मोहरत सुं बहु न लेवण अबकी साहूकार खुद गयो ।

छोरी का मां बार बीको बहुत आदर करयो। बेटी का सिंगार करयां मेंदी लगा दी सीख म मिठाई, लाडू बांध्या और खूब चोखी शिक्षा दी फेर कहयो साल भर म आवे जिका सगला तिवार बरत करणू । ससुरो न बहु रवाना हुया | रास्ता मं छोटी तीज आई। सुसरा न बहु बोली आज आपां अठ ही रेवां काल छोटी तीज हैं म्हन पूजा करणू हैं । छोटी तीज क दिन वा म्हाथो न्हायी, मेंदी लगाई पूजा करी एकासणो करी । ओर दूज दिन रवाना होयगी । पन्द्रा दिन के पछ पाछी बडी तीज आयी पाछी ससुरा न कहयों काल बडी तीज है म्हन पूजा करणू ह आपा अठ है मुकाम करां। सुसरा न केर सातु बनावण को सामान मंगायो सातु बनाया।

दूजा दिन तीज को बरत करयो कलपणो कलप्यो और सुसरा न दियो, खूब आनंद उच्छाव सुं शाम की टेम बा पूजापो लेकर नीमडी माता की पूजा करण न गई दूजी लुगायां पूजा करण लागी । बींकी बारी आई जणा नीमडी माता लम्बी होयगी । सब जणा अचम्भो करयो बा जणा म्हाथो, टेकर नीमडी माता न पूछी ओ क्यान हुयो । जणा नीमडी माता कही थारी सासू क संतान कोनी ही जणा बा म्हारी बोलवां करी ओर सव्वा मण को सातू चढावण को कही । बींक सात बेटा हुया और बा म्हारी बोलवां पूरी करणो भूलगी । बींन दंड देवण सारु ईक पहली थारा छ जेठ गायब होयगा परन्तु हाल भी बा म्हारी बोलवां पूरी कोनी करी ।

जणा बा नीमडी माता न कही अगर म्हारा छ जेठ घर पूग जाई तो म्ह थांके ६ मण का सातु चढाऊँ। पछ रात का चन्द्रमा न अरग दियो। दूजे दिन बा सुसरा क सागे रवाना होयगी । जणा बा सासरा का गांव पूगी । बीन भी बिंका जेठजी मंदिर सुं गायब हुया बठ ही ठहरावण वास्त लेकर गया । बठ जार देख तो विका छ जेठ बठे बेठयोडा हा । जणा बीन बनावन आई झिकी लुगायां सु बींकी सासु कहयो म्हारी ई बहु को पगफेरी चोखो ह म्हारा खोयोडा ६ बेटा पाछा आय गया । जणा नई बहु सासु के पगां लागर कहयो सासूजी थे घणा दिन पहली नीमडी माता के सव्वा मण सातू की बोलवां करी ओर पूरी कोनी करी। ईवास्ते निमडी माता ए सगला जेठ जी न गायब कर दी म्ह तीज न नीमडी माता कन आ बोलवां करी हूं कि म्हारा छ जेठ घर ‌वापस आजायी तो नीमडी माता के ६ मण सातू को भोग लगाऊं। आ सुन बींकी सासु न सब याद आयगो । जणा बा बाजा गाजा सुं नीमडी माता की पूजा करी सब्वा सात मण सातू को भोग लगायो । सगला घर म खूब आनंद होयग्यो ।

हे नीमडी माता बेंक ज्यान आनंद करयो सगला क करीज । कहाणी केवण वाला सुनण वाला ओर हुंकारो भरण वाला सगला क आनंद करीजै ।




बड़ी तीज व्रत कथा

Badi Teej Vrat katha


एक सावुकार हो बींक दो बेटयां ही । एक आगली की बेटी ओर एक लारली की ही । पेली लुगाई की बेटी नीमडी की पुजा करती ओर बोलती हे नीमडी माता म्हन मीठी मीठी राखीजै, दूजी लुगाई की बेटी बोलती हे नीमडी माता तू खारी हे म्हन खारी खारी राखीजे। । यान करता करता घणा दिन होयग्या एक दिन बाप बोल्यो बेटया थे कींका भाग को खावो हो छोटी बेटी बोली पिताजी म्हे थांका भाग कोही खावू हूं बडी बेटी बोली पिताजी म्हे म्हारा भाग कोही खावूं । एक दिन सगली सहेल्यां खेल रही ही छोटी बेटी बोली म्हन राजा जिशो घर वर चइजे, बड़ी बेटी बोली जो म्हारा भाग्य में हे जिको हो जाई ।

साहुकार बेठयो सुणलियो । लडक्यां बडी होणे के बाद छोटी बेटी को चोखो घर वर देख्यो व परणाई खूब सोनो चांदी घणो सारो धन दियो । बडी बेटी क वास्त एक गरीब को लडको ढुंण्डो वोभी पांगलो ओर एकदम दरिद्र नारायण। बेटी न थोडा सा टूटया फुटया बर्तन दियो । ओर रवाना कर दी । छोटी बेटी सासर जाणे क बाद सब बेपार धंदा बंद होयग्या राज पाट चलेग्यो । घाटा घणा लागग्या बहु को पायगण खराब हुयो। सगलो साफ होयग्यो । अठिन बडी बेटी सासर गयी बींक घर म खूब गरीबी ही । पण बींक पायगुण सू खूब बेपार धंधो चालबा लागग्यो । घर टूटी फुटी झोपडी हो बींको बंगलो बनग्यो धणी भी पांगलो हो जिको जच्छो होयग्यो । लुगायां बोलण लागी बवु का पग फेरां सु सब अच्छो होयग्यो ।घणा दिन होयग्या पेलो सावण आयो बाप सोंच्यो बेटया न लावण चालो छोटी बेटी के गांव म गयो तलाब की तीर पर ठेरयो लुगायां पाणी भरता भरता बोली साहूकार क बहु क्यान की आयो राज पाठ धन दौलत संब चलाग्या बहु का पाय गुण अच्छा कोनी । साहुकार बेटी न लावण गयो । सासू सुसरा बोला थांकी बेटी म्हाकी सेवा कोनी करे म्हाके घाटा घणा लागग्या । थांकी बेटी न जल्दी सु ले कर जावो ।

साहुकार न बहोत दुखः हुयो । बहोत पिस्तावो आयो म्हे तो घणोई दियो अच्छो घर देख्यो पण इका भाग म यान कोही लिख्यो हो । बडी बेटी क गांव म गयो रस्ता म तलाब पर बेठयो लुगायां पाणी भर ही केवण लागी देखो सावुकार का बेटा ही बहु कि शीक अच्छी आयी खूब आनंद होयग्यो बेपार धन्धो खूब चालन लागग्यो । धणी चोखो होयग्यो सासु सूसरा की सेवा करे । सगला‌ की आज्ञा म चाले । सावुकार न सुनकर बहोत आनंद हुयो देखो म्ह तो ईन घोर गरीब क दियो पण ईक भाग सु सब अच्छो होयग्यो। बो बेटी के घर गयो सासू सुसरा न बोलो पेलो सावण ह बेटी न भेजो सासू सुसरा बोल्या म्हे म्हाकी बहु न कोनी भेजा म्हाकी बहु म्हाकी घर की लक्ष्मी ह। बेटी न बोल्यो बेटी म्हे थारो भोत खोटो करयो पण थारा भाग म अच्छो हो सब अच्छो हुयो । बेटी न पूछयो कि ओ क्यान हुयो ।

बा बोली पिताजी म्हारा भाग्य म भगवान अच्छो ही ‌लिखयो हो म्हे नीमडी माता की पूजा करती प्रार्थना करती हे नीमडी माता म्हन मीठी मीठी राखीजे । नीमडी माता की कृपा सूं म्हन सब जणा राजी बाल भोत आनंद सूं राख । म्हे थांक साथ कोनी चालु । छोटी बेन बोलती नीमडी माता जान खारी ह म्हन खारी खारी राखीजे जिको नीमडी माता दूरासीश दिवी ।

पछ बाप छोटी बेटी न साथ घर लेयग्यो । भादवा म बडी तीज आयी नीमडी माता की पूजा कराई बेटी सू प्रार्थना कराई । माता म्हारी भूल हुयी म्हन माफ कर दो । सगलां सू मीठी मीठी राखीजे । जणा सगला जणा लाड करण लाग्या । बडी बेटी न मीठी मीठी राखी ज्यान सगला न राखीजो कहाणी केवण वाला न, के सुनण वाला न और हुकारो देवण वाला सबन ।

नोट :- तीज की कहाण्यां बोल्या पछ विनायकजी, सूरज भगवान, लपसी तपसी, पंथवारी की कहाण्यां बोलणू ।




बड़ी तीज की गीत

Badi Teej Ki Geet


निबंडी [बडी तीज के दिन निबंडी की पूजा के टाईम गाते हैं ]

उदीयापूर सू बीज मंगाय, मारुजी निबडी रुपाओ चंदन चौक म जी ॥ म्हाराराज ।।
माखनीयारी पाल बंधाय,मारुजी निंबडी सिचाओ कांचा दुधसूंजी ।। म्हाराराज । |
उगी निंबडली घेर घुमेर, मारुजी उगतडी जगमोहयो हालीजारी निंबडी ।। म्हाराराज ।।
कोई मती तोडो निबडलीरा पान, मारुजी कोई मती तोडो कांची कुंपलयाजी ॥ म्हाराराज ।।
नंनदलबाई तोड निबडलीरा पात, मारुजी देवरजी नखन्यालो तोड कांची कृपलया ।। म्हाराराज ।।
नंनदलबाई न सासरीय पोहचाय, मारुजी देवरीया नखन्यालान गढ की चाकरीजी ।। म्हाराराज ।।
नंनदलबाई न माऊजी को लाड, मारुजी देवरीयो नखन्याला बडा बीराजी को लाडलो ।। म्हाराराज ॥
नंनदलबाई न चुंदडी रो बेस, मारुजी देवरीया नखन्यालान पंचरंग मोलीयोजी ॥ म्हाराराज ॥
नंनदलबाई न आगङ घडाय, मारुजी देवरीया नखन्यालान सोवन मुखन्या कानमजी ।।म्हाराराज ॥
नंनदलबाई न करड कसार, मारुजी देवरीया नखन्यालान लचपच लौपशीजी।। म्हाराराज ॥
निबडलीरी छाया हिडोलो घालाए, मारुजी ढोलो न मखनी म दोनु हिडो हिडशाजी।। म्हाराराज ॥
निबडलीरी छाया चौपड पासा बिछाय, मारुजी ढोलोन मखनी दोनू चौपड खेलशाजी ॥म्हाराराज ।।
निबडलीरी छाया सातुडला मंगाय, मारुजी ढोलोन मखनी दोनू पिंडो पासशाजी ।। म्हाराराज ।।




बड़ी तीज का गीत | बड़ी तीज का गाना

Badi Teej Ka Geet | Badi Teej Ka Gana


म्हारा माथा न मेंमंद पिया म्हार रखडी घडावोजी
पिया आप चले बम्बई माल को जहाज भरावोजी
भरीया समंद्र -तलाब, जहाज म्हारी पार उतारोजी
म्ह अन्न बिन रहुंजी घडीया चार, पिया बिन रहुजी
म्ह खड़ी उडाऊ, काग कंत बालम घर आवोजी
म्हारा काना म कुंडल, म्हारा म्हारा मुखडा बेसर




सावन का गीत


कंकरी देऊ रे फुडाय पत्थर की बावडी, छेला श्याम सुन्दर पणियार मचक पाणी गई
घडो ये लिनो उठाय पकड लिनो बेवडो, गौरी कांई थांको रुप स्वरुप मुझे तो मोह होय रयो
गौरी थारो काई रुप स्वरुप म्हास्यु थे बात करो,
थे कांई थारो पीहर दूर, कांई सासू लडे
कांई थारो पीव, परदेश उदासी क्यूं लगी।

नहीं म्हारो पीहर दूर नहीं सासू लडे छेला है म्हारो पीव परदेश उदासी यूं लगी ।
सुनो ये बवड म्हारी बात बुरो मती मानजो, बवड सब सखीयां घर आयी थाने क्यों देरी लगी
सुनोजी सासुजी म्हारी बात बुरो मती मानजो, सासुजी गेल गेल दो पंछी जाय मुझे तो गाली दी
सुनो ये बवड म्हारी बात बुरो मत मानजो, बवड किनानीर उणीयार, किणाजी सरसा पातरा

सुनोजी सासुजी म्हारी बात बुरो मत मानजो, सासुजी, बाईजी र उगीयार देवर सरसा पातरा
सुनोजी बवड म्हारी बात बुरो मत मानजो, बवड भाग सके तो भाग, थांरो ऐ परण्यो पातलो
सुनोजी सासुजी म्हारी बात बुरो मत मानजो, सासुजी हेलो तो म्हांसु मारयो न जाय भागूं तो लाजा मरु ।




झूला का गीत


चांद र बाइजी चकमक रातजी, कोई ननद भोजायां पानी निसरी।
आगे आगे बाइजी रो साथ जी, कोई लारे नखरयाली आवज निसरी ।
चकल्यो मेंल्यो जल जमनारे तीरजी, कोई आप पधारया हरिया बाग मं ।
फीर गीर देख्यो सुंदर हरियो बागजी, कोई दांतण रे तोडयो ह कांची कोपली
रगड़ मसल धन धोया ह पांवजी, कोई रगड़ रे बत्तीसी काडी उजली।
मोरियो बेठयो जल जमना के तीरजी, कोई पांख रे पसारयो समंदर ढकलियो।
देखोजी बाइजी इन मोरियो को रुपजी, कोई थांकारे बिराजी सू दोय तील आगे रे।
जाओ ए भावज इण मोरिया के लारेजी, कोई म्हारे बीराजी न दोय परणावशां।
एक परणावां सावणिया की तीजजी, कोई दूजी रे परणाय देवां आभा बिजली।
लेल्योजी बाइजी हिवडा रो हारजी, कोई थारा रे बीराजी जाय मती केवज्यो।
वालु ए झालु ए हिवडा रो हारजी, कोई म्हारा रे बीराजी न जाय भल केवश्या।
बीराजी बेठया भरी हतायां र मांयजी, कोई थारी रे परण्यों मोरियो लेगयो।
गेली ए बेनड असल गिंवारजी, कोई म्हारी ए परण्योडी महल मं |




चन्द्रावली


ऊपर मोगलारा डेराजी, नोचे जल जमुना तीर
पानी निसरी चन्द्रावली, मोगल पकडयो छः हाथ ।
छोड़ो मोगलरा डिकरा, सासूजी देवेला गाल ।
ना छोड़ू ए चन्द्रावली तेरे लम्बे लम्बे बाल ।
स्वर्ग उडन्ती चिडीयां बाई संदेशो ले जाय ।
जाय कहीजो म्हारा बाप न बेटी चन्द्रावली छुडाय ।
मृत कहीजे म्हारी माय न, झुर झर पिजर हो जाय ।
जाय कही जे म्हारा कथ न, गोरी चन्द्रावली छुडाय ।
मत कहीजे भाई बंधु न, घर घर चर्चा होय ।
आगे बाबूलरा घोडाजी, पीछे जामण जायो बीर |
जा पीछे कंथ रा घुडला, आया जल जमुना रे तीर ।
रुपया तो देऊ डेढ सौ, मोहरा अंत न पार
छोडो बेटी चन्द्रावली, उसके लम्बे लम्बे बाल।
क्या करु रें थारा रुपया न, मोहरों देऊ बगाय
ना छोडू चन्द्रावली, पीछे मन पछताय।
लालां तो देऊं डेढ़ सौ, पन्ना अंत न पार
छोडो बेनड चन्द्रावली, उसके लम्बे लम्बे बाल ।
क्या रे करु थारा लालां न पन्ना देऊ रे बगाय,
ना छोडूं चन्द्रावली पीछे मन पछताय ।
हीरा तो देऊं डेढ सौ मोती अंत न पार
छोडो गोरी चन्द्रावली, उसके लम्बे लम्बे बाल।
क्या रे करुं थारा हीरा न, मोती देऊं रे बगाय,
ना छोडू चन्दरावली पीछे मन पछताय ।
सुन बाबुल बेहोश हुआ ,बीरो रुदन मचाय
कंथ हुरामी हुंस रया, दिन म परणूला चार ।




तंबाखू


गड बूंदी सू आयीजी तंबाखू,आया तीखा पानजी।
आयी उतारी चौक म, सौदागर फीर फीर जायजी |
भंवर तंबाखू छोड दो, म्हारा जोडी रा भरतारजी ।
पासा री पैंसा बीकेजी कोई रूपया री छंटाकजी ।
थे मत लीजो म्हारा सायबा, सासुजी रो तेज स्वभावजी।।
भनवर तंबाखू।

ई तंबाखू म तीन ही अवगुण, तीनु अवगुण खोटाजी ।
हाथ बले, हिबडो बले, मुखडा सुं आवे बासजी।।
छैल तंबाखू छोड दो।

आज अफुटा क्यूं सूत्या, थाने किस विध आयी नींदजी ।
किसी दिशा थांको चित गयो कोई किसी भायली री प्रीतजी ।
छैल तंबाखू छोड दो ।

आडा तेडा बोल मती बोलो गोरी, म्हन मन म आवे रीसजी ।
थे थांका पियर जावोजी, म्हे परणा दुजी नारजी ।
छैल तंबाखू छोड दो ।

थांकी डरायी ना डरु थे परणो दुजी नारजी ।
म्हे हाका गियर जावां राखां नसीबारी आसजी ।
छैल तंबाखू छोड दो‌

गौरी चाली बाप क पातलियां पकडयो हाथजी,
मती जावो गौरी बाप क, सूनो म्हाकी सेजजी
छेल तंबाखू छोड़ दो।




नथ


अजमेंर जाज्यो गोंदी जाज़्यो, जाज्यो समंदा पार
समंदर रा मोती लाज्यो, लालां लाज्यो चार
म्हारा बाईजी रा बीर, मुखडा न मांडन नथ ल्याज्योजी
सेज सवाई पीया नथ ल्याज्योजी
अजमेंर गया गोंदी गया, गया समंदर पार,
समंदर रा मोती लाया, लालां लाया चार ।।म्हारा।।

नथ टुटी मोती बिखन्या, लाला गमगी चार
सोधर देव ब्यान लाडूं देऊ चार ।।म्हारा।।

आलो धुंडी, गली धुंडी, धुंडी मेंला माय
छोटी सी नथ लादी खींजारे माय ।।म्हारा।।

दसरी घढाव म्हारा देवर जेठ
बीसरी घढाव म्हारा पीव परदेश ॥म्हारा।।

बोसरी तो नथ म्हासू पेरीय न जाय
दसरी पेरुंतो म्हारो नाक झोला खाय ।।म्हारा।।

मती बोलो ओ सामूजी आडा तेडा बोल
थांका जाया म्हारा नथनीरा मोल ।।म्हारा।।

मती बोलो ये बवड आडा तेडा बोल
म्हारो जायोडो थारा नथनीरो मोल |।म्हारा ।|

आगरा रो घाघरो बुरहानपूर री छींट
मुंबई सू साडी लाया रही ठीका ठीक ||म्हारा।।

फाट गयो घाघरो उदड गयी छींट
मुंबई सू साडी लाया रही ठीका ठीक ।।म्हारा।|

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