भादवा की चौथ की कहानी | Bhadwa Ki Chauth Mata Ki Kahani

एक साहुकार हो बीक सात बेटा हा । सब दिवराण्या जिठाण्या चौथ माता को बरत करयो । बेक मन म सीरो खाणे की आयी । झिरमिर पाणी बरस रहयो हो । बडोडी जिठाणी बोली आपां क्यान सीरो करां सासूजी ह, दिवराणी बोली सासूजी को काम तो म्हं करर आजाऊं । बा पाणी न गयी पाछी आकर बोली सासूजी आज बाइजी को पेट भोत दुख रहयो है । सासू बोली थे जाणो थांको काम जाणो म्ह तो बाइजी क घर जाऊं । सासूजी तो चलेग्या । बे कडाही भर सीरो बनायो । रात का चौथ माता की पुजा करी। चांद दिख्यो कोनी छऊं दिवर जिठाण्या सोयगी सातवी जो सगलां सु छोटी ही बिन नीन्द आयी कोनी क्यूं कि बा भूखी ही बींका | घर मे बी दिन रात का चोर घुसग्यो बिको नाम कुण्डालो हो । अठिन बी छोटी बहु न चांद दिख्यो बा पुकारण लागी छोटक्या भाभीजी कुण्डालो जी, बडा भाभी जो कुण्डालो जी, बिचला भाभी जी कुण्डालो जी, कुण्डालो जी यान पुकार पुकार सगली दिवराण्यां जिठाण्यां न उठा दी । सगली दिवराण्यां जिठाण्यां मिलर चन्द्रमा जी की पूजा करया । सब जीमकर सोयगी । तडक चार बज्यां सासूजी आया झाडू काढ़न लाग्या तो धन की गठडया मिली।

देखो बहुआं कित्ती पागल है रात के अठ ही छोड़ दिया । दिन निकल्यां पछे बो चोर पाछो आयो और बोल्यो कि थांकी एक बहु बहुत पढी लिखी है । बा दूसरो को नांव भी पिछाण है। साहुकार चोर न पूछयो कि कांई बात है । मन बतावो । चोर बोल्यो म्ह चोर हूं थांके अठे चोरी करन आयो हो म्हारो नाम कुण्डालो हैं । थांकी बहु पुकार करर सगली देवराण्या जेठाण्या न उठा दी म्हें लायो जिको धन डरके मार अठ छोड न भागग्यो।

जद सासूजी बहु न पूछया कि कांई बात हैं । बहु बोली सासूजी म्हांन सीरो खांवण की मन न आयी थांन बाइजी क भिजा दिया। म्हे लारसुं सीरो बनाया । सब जणा न तो नीन्द आगी पण म्हन नीन्द कोनी आयी । चांद दिख्यो जणा म्हे बांन कुण्डाला (चांद) को नाम लेर उठा दिवी । मन कोनी मालुम हो कि चोर का नाम कुण्डालो हो ।

हे चौथ माता बीन धन दियो जिस्यो सबन दींजौ । सवाग भाग अमर राखीजो । कहाणी केवण वाला और हुंकारा देवण वाला दोन्यां न सारा राखीजो।



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