Surface Web And Deep Web


इंस्टाग्राम, याहू, गूगल, फेसबुक या कोई भी ऐसी वेबसाइट, जिसको हम अपने सामान्य ब्राउजर की मदद से उपयोग कर सकते हैं, वह नॉर्मल वेब के अंदर आती है। जो भी इंटनेट हम उपयोग मे लाते है और जिसके बारे में हमें पता है, हम अपनी नॉर्मल गूगल क्रोम या किसी और नॉर्मल ब्राउजर के उपयोग से डाटा लेना या देना और मेल का उपयोग करना, ये सभी सरफेस वेब (Surface Web) कहलाते है और हम सभी इसे ही उपयोग करते है ।

अब तो हरेक इंसान के पास इंटरनेट आ चुका है। छोटे-छोटे गाव मे भी अब इंटरनेट आ चुका है और हम सभी सरफेस(Surface) को भी उपयोग करते है | लेकिन सरफेस वेब पूरे इंटरनेट का सिर्फ 8 या 9 प्रतिशत है। इंटरनेट आज पूरे पृथ्वी पर फैला हुआ है | तो आखिर बचा हुआ 92 या 91 प्रतिशत क्या है ?

जो इन्टरनेट हम रोजाना उपयोग मे लाते है या हम सब ने अब तक जो उपयोग किया है | चाहे वह फेसबुक,गूगल,याहू,यूटयूब हो | ये सारे सरफेस वेब (Surface Web) के अंदर आते हैं, सरफेस वेब मे इतनी सारी वेबसाइट और इतनी सारी चीजें हैं कि हम उसकी गिनती भी नहीं कर सकते। यहा करोड़ों वेबसाइट्स हैं पर हमें कुछ गिनी-चुनी वेबसाइट्स ही पता होती है |

इन्टरनेट का दूसरा भाग होता है डीप वेब (Deep Web) | ये काफी बड़ा हिस्सा होता है | डीप वेब को हम अपने नॉर्मल ब्राउजर से नहीं चला सकते है और जब हम डीप वेब पर जाते हो तो आइडेंटिटी हिडन (पहचान छुपी हुई) रहती है। डीप वेब ज्यादातर चीजें हिडन इसलिए होती हैं क्यूंकि वहां पे एक सिक्योरिटी रहती है। जिस प्राइवेसी को हम सरफेस वेब मे कम करते जा रहे है, डीप वेब मे वह बनी रहती है, डीप वेब मे कोई भी इन्सान जरूरत न पड़ते पर अपनी पहचान बताए बिना, कोई भी चीज खरीद सकता है, सर्च कर सकता है और कुछ भी जान सकता है | अपनी पहचान बताए बिना कुछ भी जानकारी को शेयर किया जा सकता है इसलिए डीप वेब मे काफी सारी इल्लीगल एक्टिविटीज भी होती हैं।

What is Onion Browser ?


डीप वेब पर जाने के लिए हमे एक अलग ब्राउज़र की जरूरत होती है और उस ब्राउजर का नाम है Onion Router (अनियन राउटर) या Onion Browser (अनियन ब्राउजर) | इसका नाम अनियन ब्राउजर इसलिए रखा गया क्योंकि अनियन अर्थात प्याज होता है | इसमे प्याज की तरह अलग-अलग और बहुत सारी लेयर्स होती हैं और जो बिलकुल समान प्रक्रिया का उपयोग करता है ब्राउजर के लिए | जब हम इसका उपयोग करते है तो मल्टिपल लेयर्स के नीचे हमारी पहचान छुप जाती है और बार-बार चेंज होने वाले एड्रैस की वजह से हमारी आइडेंटिटी हिडन रहती है, इसी वजह से काफी सारे क्रिमिनल्स इसमे इल्लीगल चीजें करते हैं जैसे हथियार बेचना-खरीदना, ड्रग्स बेचना-खरीदना एवं ह्यूमन ऑर्गन्स बेचना-खरीदना | डीप वेब पर हमे ऐसे हैकर्स मिल जाएंगे जो हमसे बहुत कम पैसे लेकर किसी का बैंक अकाउंट हैक कर सकते हैं या किसी की क्रेडिट कार्ड डीटेल दे सकते या फिर किसी की इंस्ट्राग्राम, फेसबुक आईडी हैक कर सकते हैं। इतने पावरफुल हैकर वहा आसानी से मिल सकते हैं और दुनिया भर की जो सबसे ज्यादा इंटेलिजेंट क्रिमिनल होते हैं, वो डीप वेब पर मिल जाएंगे |

डीप वेब मे क्रिमिनल्स जो भी इल्लीगल चीजें करते हैं जैसे हथियार बेचना-खरीदना, ड्रग्स बेचना-खरीदना एवं ह्यूमन ऑर्गन्स बेचना-खरीदना ये सभी पेमेंट बिटकॉइन (Bitcoin) में लेते हैं क्योंकि बिटकॉइन को ट्रेस नहीं किया जा सकता |

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