रवि वर्मा | राजा रवि वर्मा | Raja Ravi Varma | Ravi Varma


हमारे देश का एक बहुत छोटा राज्य केरल है, जो दक्षिण में पश्चिमी तट पर स्थित है और नारियल वृक्षों के कुंजों के लिए विख्यात है। इसी राज्य में हमारे एक महान चित्रकार का जन्म हुआ, जिसका नाम था राजा रवि वर्मा।



राजा रवि वर्मा की कला शैली


आधुनिक युग में वह अपने देश के संभवतः सबसे अधिक लोकप्रिय कलाकार थे। उन्होंने ही पहले-पहल चित्रों के प्रकाशन के लिए यूरोप से छपाई की मशीनें मंगवाई और अपने चित्रों को क्या गरीब, क्या अमीर, सभी के घरों में पहुंचाया। उनके चित्रों का विषय धार्मिक और पौराणिक कथा-कहानियां होता था। रवि वर्मा के इन चित्रों ने मध्य वर्ग के परिवारों को अपनी ओर बहुत आकर्षित किया।



आज पान-बीड़ी की दुकानों में जहां फिल्मी अभिनेताओं और अभिनेत्रियों के चित्र लगे रहते हैं, वहां किसी समय में राजा रवि वर्मा के धार्मिक चित्र इन दुकानों की शोभा बढ़ाया करते थे।


राजा रवि वर्मा का जन्म


राजा रवि वर्मा का जन्म २९ अप्रैल, १८४८ को केरल की राजधानी तिरुअनंतपुरम से थोड़ी दूर किलीमन्नूर गांव में तिरुवांकुर के राज-परिवार से संबंधित परिवार में हुआ था। उनके चाचा राजा राज वर्मा चित्रकला में दिलचस्पी रखते थे और तिरुवाकर नरेश के निजी चित्रकार उन्हें कला के नियम बताते थे। अपने चाचा की चित्रकला को देख रवि वर्मा ने भी दीवारों पर चित्र बनाने शुरू किए और जमींन पर कोयले से चित्र बनाने का अभ्यास करने लगे। यह सब देखकर रवि वर्मा के चाचा ने उनको अपने सुपुर्द कर लिया। चौदहा वर्ष की आयु में राजा रवि वर्मा का तिरुअनंतपुरम के राज-प्रासाद में गुरु प्रवेश हुआ। वहां पर वह राज चित्रकार रामास्वामी नायडू के संपर्क में आए।


राजा रवि वर्मा का विवाह


१८६५ में राजा रवि वर्मा का विवाह रानी लक्ष्मी बाई की सबसे छोटी बहन से हुआ। इसके फलस्वरूप वह एक प्रकार से राज-परिवार के ही सदस्य बन गए।


राजा रवि वर्मा प्रथम भारतीय तेल चित्रकार


तिरुवांकुर नरेश ने १८६८ में एक अग्रेज चित्रकार थेडयोर जेनसन को आमंत्रित किया। रवि वर्मा ने उनसे भी कला सीखी। उनके संपर्क में आने पर रवि वर्मा ने चित्रकला का नया माध्यम जाना। यह नया माध्यम था, तेल चित्र तैयार करने का। उस समय तक तेल-रंगो से चित्र नहीं बनते थे। रवि वर्मा ने सर्वप्रथम १८७३ में मद्रास फाइन आर्टस प्रदर्शनी में अपने चित्र प्रदर्शित किए थे।


राजा रवि वर्मा का प्रथम पुरस्कार


उस समय उनकी आयु २५ वर्ष की थी। इस पहली ही प्रदर्शनी में उनको प्रथम पुरस्कार मिला था। बस, यही से उनकी सफलता का श्रीगणेश हुआ। इस प्रदर्शनी में उनके चित्रों को देखने के बाद मद्रास के तत्कालीन गवर्नर ने उनसे अपने लिए कई चित्र बनवाए। प्रिंस आफ वेल्स जब १८७५ में भारत आए, तो वह तिरुअनंतपुरम भी पधारे, तिरुवाकुर नरेश ने रवि वर्मा के चित्र उनको भेट किए। रवि वर्मा को १८७८ में शकुंतला पत्र लेखन नामक अपने चित्र पर गवर्नर-जनरल का स्वर्ण-पदक मिला। इस चित्र को मद्रास के गवर्नर ने खरीद लिया।

१८८० में पूना और १८९२ में वियना और शिकागों की प्रदर्शनियों में भी रवि वर्मा ने भाग लिया। दर्शकों ने उनके चित्रों की भूरि-भूरि प्रशंसा की। मैसूर के नरेश ने प्रशंसा सुनने पर राज परिवार के सदस्यों के चित्र बनाने के लिए उनको आमंत्रित किया। तत्पश्चात् बड़ौदा के नरेश ने भी आमंत्रित किया। बड़ौदा में कुछ समय रहकर महाराजा के महल की कला-वीधी के लिए हिंदू धर्म से संबंधित विषयों पर चित्र बनाए।


राजा रवि वर्मा का छापाखाना


रवि वर्मा के चित्रो की मांग दिन-प्रतिदिन बढ़ती जा रही थी, अतः बड़ौदा के दीवान के सुझाव पर उन्होंने बंबई में एक छापाखाना खोला और अनेक चित्रो को छपवाकर जनता की मांगो को पूरा करने का प्रयत्न किया। कहते है कि उनके छापेखाने के पूर्व हमारे देश में केवल कलकत्ता में एक आर्ट स्टूडियो के पास लिथो की मशीन थी, जिससे चित्र छापे जाते थे।


राजा रवि वर्मा की मृत्यु


रवि वर्मा अपने जीवन के अतिम दिनों तक कला की सेवा करते रहे। २ अक्तूबर १९०६ मे किलीमन्नूर में ही रवि वर्मा का निधन हुआ।

रवि वर्मा के चित्र तिरुअनंतपुरम की सरकारी चित्रालय वीथी, बड़ौदा के लक्ष्मीविलास महल, मैसूर नरेश के महल, राजस्थान के उदयपुर महल और हैदराबाद के सालारजंग संग्रहालय की शोभा बढ़ा रहे हैं। नई दिल्ली की राष्ट्रीय कलावीथी में भी उनके दो चित्र हैं।


FAQ`s

Questation : राजा रवि वर्मा क्यो प्रसिद्ध है?

Answer : आधुनिक युग में राजा रवि वर्मा अपने देश के संभवतः सबसे अधिक लोकप्रिय कलाकार थे। उन्होंने ही पहले-पहल चित्रों के प्रकाशन के लिए यूरोप से छपाई की मशीनें मंगवाई और अपने चित्रों को क्या गरीब, क्या अमीर, सभी के घरों में पहुंचाया।


Questation : राजा रवि वर्मा का जन्म कहाँ हुआ?

Answer : राजा रवि वर्मा का जन्म २९ अप्रैल, १८४८ को केरल की राजधानी तिरुअनंतपुरम से थोड़ी दूर किलीमन्नूर गांव में तिरुवांकुर के राज-परिवार से संबंधित परिवार में हुआ था।


Questation : चित्रकला का जनक कौन था?

Answer : आधुनिक चित्रकला का जनक राजा रवि वर्मा को माना जाता है | उन्होंने ही पहले-पहल चित्रों के प्रकाशन के लिए यूरोप से छपाई की मशीनें मंगवाई थी |


Questation : प्रथम भारतीय तेल चित्रकार का नाम क्या है?

Answer : प्रथम भारतीय तेल चित्रकार का नाम राजा रवि वर्मा है | तिरुवांकुर नरेश ने १८६८ में एक अग्रेज चित्रकार थेडयोर जेनसन को आमंत्रित किया। रवि वर्मा ने उनसे भी कला सीखी। उनके संपर्क में आने पर रवि वर्मा ने चित्रकला का नया माध्यम जाना। यह नया माध्यम था, तेल चित्र तैयार करने का।


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