आसोज की कहानी | Asoj Ka Mahina Ki kahani


श्राद्ध पक्ष


आसोज का महिना म भादवा सुदी पूनमसूं अमावस तांई १५ दिन श्राद्ध पक्ष कहलाव । कोई भी आपका बडेरा पितरां को तिथि के हिसाबसू श्राद्ध कर । श्राद्ध क दिन तर्पण कराव, ब्राह्मणां न भोजन कराव, कपड़ा देव, दक्षिणा देव, कागोल निकाल । तर्पण म पान सुपारी, काला तिल, जौ, चन्दन, जनेंवु, तुलसी का फुल, काचो दूध, पाणी लेव । जठे तर्पण करावे बठे गोबर सुं नीपण खीर, पूडी या स्वर्गीय न पसन्द आवती वा रसोई म मीठी बनाणू। हाथ जोड़णू ब्राह्मणसूं आशीर्वाद लेणू और बोलणूं कि पितरेश्वरां की गति होवो।


नाना पड़ंवा


ई दिन दोयतो आपका नानाजी को श्राद्ध करे । तर्पण करे । तर्पण में नान्देरा का स्वर्गवासी हुयोड़ा बडेरां को तर्पण करे |


नाना पड़ंवा की कहानी


एक बेन भाई हा । भाई आपकी लुगाई न बोल्यो कि म्हे म्हारा माताजी पिताजी न गया सरावण जावूं हूं । तू लार म्हारी बेन न चोखा चोखा जीमन करर जीमाइजे । बेन को नाम गोदा हो । बी गांव म ही लुगाई की बेन खोदा रेवती ही। बो तो गया सरावण न चलेग्यो । बा ननंद न नहीं जीमार आपकी बेन न जीमाबा लागगी |बा बोली गोदा जीम तो कांई खोदा जीम तो कांई ? बीका सुसराजी को श्राद्ध आयो । बा नणंद न कवाई आज थांका पिताजी को श्राद्ध हैं जिको काम करावण न आइज्यो । अगर पेड़ हिल तो थांक न्यूतो हैं पत्ता हिल तो कोनी । बेन दिनुगा बेगी बगी आई और टाबरा न बोली आज नानाजी को श्राद्ध हैं ई पेड़ कन बैठ जावो अगर ओ हल तो जीमण आइज्यो, पान हल तो मती आइज्यो । बा पीयर गई आटो पीसायो रसोई करी, दाल पीसी घर को सगलो काम करायो पण भोजाई बीन जीमण को कोनी कयो । बा रवाना होबा लागी जणा भी साथ की दियो कोनी।

बा अपका हाथ सूं आटा भरयोड़ा ही जाबा लागी ओर सोची कि टाबरां न राबड़ी करर खिलावूं । भोजाई बोली बाईजी हाथ धोर जावो । थांका पिताजी कोरो आटो खार चलया जाई । बेटी न दु ख हुयो। घर आई । टाबर बोल्या मां तू कांई ल्याई ? बा रस्ता म आयोड़ी नदी म सूं कांकरा लेयगी ही ज्याने हाण्डी म चढ़ा दिया। बोली मामाजी गेहूं दिया है वे उबल रया हैं की बचयो कोनी । अर्थात भोजाई सुसरा का श्राद्ध क दिन नणंद सूं यान को व्यवहार करयो । बीको भाई जब तर्पण कराबा लाग्यो जणा खून का छींटा पडया। जणा बो पण्डित न पूछयो आ कांई बात हुई। पण्डित बोल्या थारी बेन भूखी हैं । बीन जीमाया कोनी । या बात सुणर भाई न बहोत दुःख हुयो |वो बोल्यो म्हारी एक ही बेन है म्हे म्हारी लुगाई न बोलर आयो हूं कि १५ दिन घर म बेन न जीमाइजे ।

बेटी न अमावस की रात बाप सपना म आर बोल्यो कि बेटी तू नहीं जीमी तो म्हे भी कोनी जीम्यो । बाप बोल्यो एकम न म्हारो नान सराद करीजे । जावतां जावतां डांगड़ी फेरग्या । बीकी वजह सूं खूब धन होयग्यो । सोना, चांदी, अनाज, घी, तेल सुख सम्पदा होयगी बा दिनुगां ऊठर देखी तो सारा घर म भण्डार भरयोडो हो। जल्दी जल्दी दूध ल्याई ब्राह्मणां न नूतो दियो। आपर पीर जार बोली आज म्हारे नान सराद है जिको थे सगलां जीमण न आईज्यो । भोजाई बोली खावणं न तो दाणा कोनी कांई तो जीमाई ? पण आपा जीमण न जावां और हंसी उडावा | पीर का लोग जीमण न आया । बठ तो भगवान की किरपासूं घणो ही अन्न धन होयग्यो । भोजाई न अचम्भ हुयो इत्तो धन कठसूं ल्यायी। भाई पाछो आयो बो आवतां ही लुगाई न पूछयो म्हारी बेन न जीमाई कांई। लुगाई बोली थांकी बेन न इत्त जीमाई ओर इतो धन दियो जिको थांकी बेन क आनन्द होयग्या भाई बेन क गयो बेन आप बीती सगली बातां बताई । भाई आपक घर जार लुगाई न बोल्यो थारा पीर मं लाय लागगी । खावणं न रोटी पेरण न कपड़ो कोनी रयो । तू की देव तो ले जाऊं बा गवां को गाडो भर दियो घी को डब्बो रख दियो, गुड को भेली रख दी तेल को डब्बो कपडा को पोटलो रुपया की थैली भरर रख दी । साथ बेटा न बैठा दियो और बोली नानी न दे दीजै ।

बाप बेटा रवाना हुया । बेना क गांव जावण लांग्या । बेटो बोल्यो पिताजी ओ तो भुआ का गांव को रस्तो है । नानी का गांव को रस्तो कोनी पिताजी बोल्या चुप बैठ बेन न घर गया गाडी खाली करण लाग्या तो बेन बोली भाई म्हारे तो घणो ही हैं म्हारे की कोनी हो जणा तो की दिया कोनी अब म्हारे भगवान की कृपा है ,बाप बेटा गाडी खाली करर पाछा घर आया जणा बेटो मां न बोल्यो मां मां सारो धन अनाज कपडा पिताजी तो भुआ गोदा के देर आयग्या बा रीसार सोयगी बारसूं धणी आयो बो पूछ्यो आज तू सूती क्यू ? लुगाई जवाब दिवी आज म्हारो पेट घणो दुख हैं धणी बोल्यो कांई करणेसूं कम होई बा जवाब दिवी थांकी बेन को माथो मुंडार काला कपडा पेरार गधा पर बेठार लेर आवो तो म्हारो पेट दुखतो रेव धणी बोल्यो अच्छा अच्छा अबार लाऊं आपक सासर गयो सुस्त होर बैठग्यो सासू पूछी कंवरजी थे सुस्त क्यान हो बो पाछो जवाब दियो कि थांकी बेटी को पेट घणो दूख जिको लोग बोल्या बी की मां को माथो मुंडार काला कपडा पेरार गधा पर बेठार लेर आवो तो पेट दुखतोरे जाव म्हारी बेटी को पेट दुखतोरे जावे तो अवार चालू ।

नाई न बुलाया काला कपडा पेरया और गधा पर बेठर गयी आगे गया तो बेटी धणी न बोली थे ओ कांई करया । बो जवाब दियो" देख बन्दे की फेरी मां तेरी क बेन मेरी' सासू आपक घर पाछी गयी दूजे दिन लुगाई जीमी कोनी तो धणी पूछयो आज कांई होयो थार बा बोली आज म्हारे सांझ्यां को बरत है । शाम का सांझ्यां पूजण बैठी और बोली म्हे थन पूजं ए सांजूंजी मरजो सासू जायी नणदली" दूजे दिन धणी बोल्यो आज म्हे जीमू कोनी लुगाई पूछी थांके केको बरत है धणी बोल्यो आज म्हारे "ऊंट कटाल" को बरत हैं । पूजा करण बठयो और बोल्यो म्हे थन पूजूं "ऊंट कटाला" मरज्यो म्हारो सुसरो दोनु साला ।लुगाई बोली यान का धणी सुं म्हे बसर आऊं कोनी ।

दोनु जणा रीस छोडया। बेन बेटी न देवण सूं की कमी हुव कोनी ब्यांका भाग सू आपान भोत मिले पितरेश्वर आशीष देव।


नौरता पूजन विधि | नवरात्रि पुजा


आसोज सुदी एकम सूं नवरात्रि की पूजा चालु हुवे । ई दिन घट स्थापना करे । लोग नवरात्रि का एकासणा या बरत करे । कोई अष्टमी न पूजा करे कोई नवमी न पूजा करे। जणा माताजी को हवन हुवे । लोग जंवारा भी बावे । अष्टमी न या नवमी न हवन हुयां पछ लापसी, को भोग लगावे ब्राह्मण की कंवारी कन्या न या सवागण ब्राह्मणी न जीमावे ओर शक्ति अनुसार दक्षिणा देवे ।


दशरावो पूजन | दशहरा पूजन विधि


आसोज सुदी दशमी न दशरावो आव । बी दिन मीठी रसोई म पूरण पोली बनाणूं । घर म कोई औजार, मोटर गाडी, साइकिल, स्कूटर, तराजू, बाट न धोर साफ करर कुंकूं, हल्दी, अगरबत्ती, फुल सूं पूजा करणू। घर का दरवाजा क आम का पत्ता की ओर गेदा का पूष्प की बांदर वाला बांधणू ई दिन भगवान श्रीराम रावण न मारया हा सगला देवी देवता को संकट निवारण करया हा । दशरावा को दिन बहुत अच्छो रेव माथो न्हाणू नवां कपडा पेरणू मन्दिर जाणू सबसू मिलणू जुलणू । बडा न प्रणाम करणू ,आशीष लेणूं । आज को दिन शुभ मुहुर्त है । बडेरा साढ़ा तीन अनपूच्छया मोहरत बतावे वो एक हैं।


शरद पूर्णिमा व्रत | कोजागिरी व्रत


आसोज सुदी पूनम न शरद पूर्णिमा आव । बी दिन भगवान क सफेद वस्त्र धारण कराणूं भगवान क खीर को प्रसाद बनाणूं खुली छत पर रखणूं खीर म भगवान चन्द्रमा की किरण पडणू बी दिन भगवान चन्द्रमा की किरण म सूं अमृत बरस ह । रात का बारा बज्यां तांई भजन कीर्तन करणूं । भगवान की आरती करणूं सगला मिलकर भगवान को प्रसाद पाणूं ।

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