मिनोआई सभ्यता | क्रीट की सभ्यता | मिनोअन सभ्यता । Minoan Civilization | Crete Civilization


शानदार ढंग से सुसज्जित महलों का टापू, क्रीट संसार की प्रारंभिक तथा प्रसिद्ध सभ्यताओं में से एक सभ्यता माना जाता है । १५६ मील लंबे इस टापू में अपनी कृषि योग्य घाटियों तथा पर्याप्त वर्षा के कारण ५००० ई.पू. के लगभग कांस्य युग के शुरू में जीवन आरंभ हुआ ।

क्रीट सभ्यता को मिनोआई भी कहा जाता है । मिनोआई नाम प्राचीन नगर नोसोस (Knossos) के एक पौराणिक राजा माइनोस (Minos) के नाम के आधार पर रखा गया है । ५००० ई.पू. के लगभग जो प्रथम निवासी क्रीट में आकर बसे, वे या तो एशिया माइनर (Asia minor) से आये थे, या फिर पूर्वी भूमध्य सागर से । उन्होंने पाल से चलने वाली आदिकालीन (Primitive) नावों में समुद्र पार किया । अंतः में समुद्र के स्वामी बन गये और समुद्र उनकी समृद्ध सभ्यता का आधार बन गया । अन्य सभ्यताओं के विपरीत, क्रीट निवासी शांतिप्रिय थे तथा अपनी शक्ति का प्रयोग अपने साम्राज्य को शक्तिशाली बनाने के लिये करते थे । समय बीतते-बीतते वे निडर नाविक दूरदर्शी व्यापारी, गुण-संपन्न भवन निर्माता तथा कुशल नगर-नियोजक बन गये । उन्होंने स्पेन, उत्तरी अफ्रीका तथा मिस्र के साथ जैतून के तेल, सोने, मोती तथा हाथी-दांत का व्यापार किया ।

२००० ई.पू. के लगभग आर्थिक तथा सामाजिक प्रगति ने उनकी स्थापत्यकला को प्रभावशाली ऊंचाइयों तक पहुंचा दिया । पत्थर से बने हुए मलिया, नोसोस तथा फैस्टोस (Phaistos) के महल उनकी श्रेष्ठ वास्तुकला के उदाहरण हैं । उनकी राजधानी नोसोस भूचालों से दो बार उजड़ी तथा फिर दो बार बसायी गयी । ऐसी थी क्रीटवासियों की शक्ति तथा क्षमता ।

वास्तुकला में कुशल होने के साथ-साथ मिनोआई चित्रकला में भी निपुण थे । उस काल के भित्तिचित्र (Fresco) दर्शनीय हैं, यद्यपि उनकी कला निपुणता को प्रमाणित करने के लिये हमें बहुत कम अवशेष प्राप्त हो सके हैं । पाये गये अधिकांश भित्तिचित्रों में पक्षी, पौधे, पशु तथा मनुष्य चित्रित किए गये हैं ।

मिनोआई युग के अंत में जो १५०० ई.पू. के लगभग था, उन्होंने पीले तथा लाल रंगों में मिट्टी के बर्तन भी बनाये । उन्होंने रूपांकन के लिये प्राकृतिक उपादानों का ही प्रयोग किया तथा मुख्यतः इस काम के लिये फूलों को ही चुना । फूलों में भी विशेषतः कुमुदिन (Lily) के फूलों को चित्रित किया गया । उनकी कला, वस्तुतः पूर्ण रूप से मौलिक थी ।

उनकी कला के समान उनकी लेखन-शैली भी पूर्णतः मौलिक थी । क्रीट की मुद्राओं पर बने चित्र-प्रतीकों (Picture Symbols) को देखकर प्रतीत होता है कि वे लोग भी चित्र-लिपि शैली का ही प्रयोग करते थे । फैस्टोस के एक प्रारंभिक प्रासाद में प्राप्त मिट्टी की पट्टिकाओं से ज्ञात होता है कि उस समय तक सामान्य प्रयोग के लिये एक सरल अक्षरात्मक (Syllabic) लेखन-शैली खोज ली गयी थी । यह मुख्यतः किसी प्रकार के कागज या सुखाए गये चमड़े (Parchment) पर लिखी जाती होगी, लेकिन यह सामग्री अभी तक उपलब्ध नहीं हो सकी है ।

यूनानियों द्वारा यूनान पर अधिकार किए जाने से पूर्व क्रीट (Crete) में एक पूर्णतः विकसित सभ्यता हुआ करती थी, किन्तु इसके सभी चिह्न ज्वालामुखीय विस्फोट द्वारा नष्ट हो गये । सन् १९०० के प्रारंभ में क्रीट की यही सभ्यता मिनोआई सभ्यता के रूप में प्रकाश में आयी ।

उनकी मूलकृति का अब तक भी अनुवाद नहीं हो सका है क्योंकि इसकी भाषा अभी भी पढ़ी नहीं जा सकी है । इतिहासकारों ने इसका नाम लीनियर-ए (Linear A) रखा है ।

इतिहासकारों का अनुमान है कि वहां राजतंत्रीय शासन रहा होगा । प्राप्त साक्ष्यों से सिद्ध होता है कि धार्मिक पूजा में राजा का स्थान सर्वोच्च होता था तथा उसका महल धार्मिक अनुष्ठानों का मुख्य केन्द्र होता था । वास्तव में उनका धर्म एक देवी मां के चारों ओर केन्द्रित था । अनेक मुद्राओं पर नारी- आकृतियां चित्रित की गयी हैं । उनकी कुछ आस्थाएं थीं । वे मानते थे कि मनुष्य बिलकुल अलग प्रकृति से भी सर्वोच्च है । अपने एक धार्मिक संस्कार में क्रीटवासी एक बैल के सींगों के ऊपर से होकर छलांग लगाया करते थे किन्तु उस बैल को कोई हानि न पहुंचे, इस बात का पूरा-पूरा ध्यान रखा जाता था । यह धार्मिक संस्कार प्रकृति पर मनुष्य की सर्वोच्चता का प्रतीक था । निश्चय ही इस धार्मिक संस्कार के कारण ही बाद में "माइनोटोर" (Minotaur) अथवा "वृषमानव" (Bullman) के पौराणिक आख्यान (Legend) का जन्म हुआ होगा ।

सुदूर प्रदेशों जैसे मिस्र में पाये गये मिनोआई लोगों द्वारा निर्मित मिट्टी के बर्तनों पर प्रदर्शित कला वस्तुतः इस सभ्यता के वैभव की कहानी कहती है । यह भी पता चलता है कि उनकी संस्कृति किसी अन्य सभ्यता से आयातित न होकर पूर्णतः मौलिक थी ।

१७०० ई.पू. में हुए प्राकृतिक विनाश के पश्चात् राजभवनों का पुनर्निर्माण किया गया । आज इन पनर्निर्मित राजभवनों के केवल अवशेष ही देखने को मिलते हैं । पुनर्निर्माण के लिये लकड़ी के ढांचे बनाये गये और फिर उनमें चूने-कंकड़ का प्रयोग किया गया । ऐसा उन भुचालों के दुष्प्रभावों से बचने के लिये किया गया था, जो उस द्वीप में प्रायः आया करते थे । भीतरी दीवारों पर प्लास्टर किया जाता था, तथा उन्हें विशाल रंग-बिरंगे भित्तिचित्रों द्वारा सजाया जाता था । सेलखड़ी (Albaster) के टुकड़ों से पक्के फर्श बनाये जाते थे । किन्तु उनके भवन निर्माण का सर्वाधिक आश्चर्यजनक पहलू वहां की जल निकासी व्यवस्था (Drainage System) थी । वह वास्तव में १८वीं शताब्दी के यूरोप की निकासी व्यवस्था के समान ही उन्नत थी ।

इस महान् सभ्यता के अंत के विषय में विद्वानों के विभिन्न मत हैं । मिनोआई सभ्यता के पतन का जो कारण सर्वाधिक स्वीकृत है वह है-१४५० ई.पू. में थेरा (Thera) की महाजलप्रलय । समुद्रीय ज्वार की लहरें जब क्रीट पहुंची तो ये ३०० फुट ऊंची उठ रही थीं । इन भयंकर लहरों ने इस टापू की घनी आबादी वाले उत्तरी तट को झिंझोड़ दिया, परिणामस्वरूप अनेक लोग मारे गये । द्वीप के भवन मिट्टी में मिल गये तथा अर्थ-व्यवस्था नष्ट-भ्रष्ट हो गयी । यह सब इतना अचानक हुआ कि क्रीटवासियों को सोचने तक का मौका नहीं मिला ।

इस प्रकार महान् मिनोआई सभ्यता के स्वर्ण युग का विनाश एक ही दिन में अविश्वसनीय प्राकृतिक शक्तियों के द्वारा हो गया । मिनोआई लोगों का स्थान प्रांतीय मायसीनियनों (Mycenaeans) ने ले लिया और उनके गौरवपूर्ण किन्तु ध्वस्त (Ruined) प्रासाद शताब्दियों तक विस्मृति के गर्भ में सोए रहे ।

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