रोग निवारण मंत्र | रोग निवारण बीज मंत्र | ऋतु वेदना निवारण मन्त्र | मासिक विकार दूर करने का मन्त्र | रोग नाशक मंत्र | प्रसव कष्ट निवारण मंत्र | प्रसव पीड़ा निवारण मंत्र | मृगी रोग हरण मंत्र | रतौंधी विनाशक मंत्र | नेत्र रोग निवारण मंत्र | स्त्री सौभाग्यवर्द्धक मंत्र | सौभाग्य सुंदरी मंत्र | चोर भयहरण मंत्र | चोर पकड़ने का मंत्र | Saubhagya Sundari Mantra | Rog Nashak Mantra | Rog Nashak Mantra in Hindi | Netra Rog Nivaran Mantra


रोग निवारण मन्त्र | रोग निवारण बीज मंत्र | Rog Nashak Mantra | Rog Nashak Mantra in Hindi


पर्वत ऊपर पर्वत और पर्वत ऊपर फटिकशिला फटिका
शिला ऊपर अञ्जनी जिन जाया हनुमन्त नेहला टेहला
काँख की कखराई पीछे की आदटी कान की कनफटे रान
की बद कंठ की कंठमाला घुटने का डहरु डाढ़ की डेढ़ शूल
पेट की तापतिल्ली क्रिया इतने को दूर करे मस्मन्त
नातर तुझे माता का दूध पिया हराम मेरी भक्ति-गुरु की
शक्ति फुरो मन्त्र ईश्वरो वाचा सत्य नाम आदेश गुरु का ।


सिद्ध करने की विधि : सात शनिवार हनुमान जी की मूर्ति के सन्मुख धूप दीप प्रज्वलित कर नैवेद्यादि अर्पित कर नित्य १०८ बार मन्त्र का जाप करे, मन को सर्वथा शुद्ध रखे, कामेच्छा आदि विकार मन में न आने पावे, इस प्रकार सिद्धि प्राप्त हो जाने पर कखवारी, बद, कंठमाला, दाढ़ शूल, कन-फेर, अदीठ के रोगी को राख से १०८ बार मन्त्र पढ़कर झाड़े तथा तापतिल्ली को छुरी से १०८ बार मन्त्र पढ़ कर झाड़ने से उपरोक्त रोग दूर होते हैं ।

विशेष : रोग दूर हो जाने पर रोगी से हनुमान जी को प्रसाद चढ़वा कर वितरित करे और किसी से कोई द्रव्य ग्रहण न करे ।


ऋतु वेदना निवारण मन्त्र


ॐ नमो आदेश देवी मनसा माई बड़ी बड़ी अदरख पतली
पतली रेशे बड़े विष के जल फांसी दे शेष गुरु का बचन
जाय खाला पिया पञ्च मुण्ड के बाम पद ठेली विषहरी
राई की दुहाई फिरै ।।


प्रयोग विधि : अदरख को तीन बार मन्त्र पढ़कर रोगिणी को खिलाने से ऋतुमती की वेदना शान्त होती है ।


मासिक विकार दूर करने का मन्त्र | रोग नाशक मंत्र


आदेश श्री रामचन्द्र सिंह गुरु को तोडू गाँठ औंगा ठाली
तोड़ दूँ लाय तोड़ि देऊँ सरित परित देकर पाय यह देखि
हनुमन्त दौड़ कर आय अमुक का देह शांति वीर भगाय
श्री गुरु नरसिंह की दुहाई फिरै ।।


प्रयोग विधि : एक पान का बीड़ा ले तीन बार मन्त्र पढ़ कर खिलाने से समस्त प्रकार के मासिक विकार दूर होते हैं ।


प्रसव कष्ट निवारण मंत्र | प्रसव पीड़ा निवारण मंत्र | Prasav Pida ka mantra


ॐ मन्मथ मन्मथ वाहि वाहि लम्बोदर मुञ्च मुञ्च स्वाहा ।
ओं मुक्तापाशा विपाशश्च मुक्ता सूर्येण रश्मयः ।।
मुक्ता सर्व्व फयादर्भ एहि मारिच स्वाहा । एतन्मन्त्रेणाष्ट वार
जयनभि मन पितम तत्क्षणात् सुख प्रसवो भवति ।।

प्रयोग विधि : केवल एक हाथ से खींचा हुआ कुयें का जल लाकर ८ बार मंत्र पढ़कर पिलाने से प्रसववेदना दूर होती है तथा बालक सुख पूर्वक होता है ।

विशेष : एक हाथ से कुयें का जल खींचने के बाद जमीन पर न रखना चाहिये अन्यथा उसका प्रभाव निष्फल होगा ।


मृगी रोग हरण मंत्र


ॐ हलाहल सरगत मंडिया पुरिया श्री राम जी फूंके,
मृगी बाई सूखे, सुख होई ॐ ठः ठः स्वाहा ।।


प्रयोग विधि : भोजपत्र पर अष्टगंध से इस मंत्र को लिखकर गले में बाँधने मात्र से रोग चला जाता है ।


रतौंधी विनाशक मंत्र | नेत्र रोग निवारण मंत्र | Netra Rog Nivaran Mantra


ॐ भाट भाटिनी निकली कहे चलि जाई उस पार जाइब हम
जाऊं समुद्र । भाटिनी बोली हम बिआइब उसकी छाली बिछाइब हम
उपसमाशि पर मुण्डा मुण्डा अण्डा ।



स्त्री सौभाग्यवर्द्धक मंत्र | सौभाग्य सुंदरी मंत्र | Saubhagya Sundari Mantra


ॐ ह्रीँ कपालिनि कुल कुण्डलिनि मे सिद्धि देहि
भाग्यं देहि देहि स्वाहा ।।

प्रयोग विधि : यह मंत्र कृष्ण पक्ष की चौदस से प्रारम्भ करके अगले महीने की कृष्ण पक्ष की तेरस तक-यानी एक मास तक नित्य एक सहस्र बार जाप करने से स्त्रियों की समस्त आधि-व्याधियाँ दूर होती हैं और स्त्री पति, पुत्र, परिवार आदि की प्रिय हो जाती है ।


चोर भयहरण मंत्र | Chor Bhag Haran Mantra


ॐ करालिनी स्वाहा ॐ कपालिनी स्वाहा
चोर बंधय ठः ठः ठः ।

यह मंत्र १०८ बार जाप करने से सिद्धि होती है । प्रयोग के समय सात बार मंत्र पढ़कर थोड़ी सी मिट्टी द्वार पर की भूमि में गाड़ दे तो भवन में चोर घुसने का भय नहीं रहता ।


धन सहित चोर पकड़ने का मंत्र | चोर पकड़ने का मंत्र


ॐ धूमाजक हुँकार स्फटिका दह दह ॐ

प्रयोग विधि : मंगलवार या रविवार के दिन कर्मटिका वृक्ष के नीचे मृगासन पर बैठ कर गांधूली की लकड़ी जलाये | सरसों तथा गुग्गुल से उपरोक्त मंत्र पढ़ते हुए हवन करने से चोरी किये धन सहित चोर वापस आ जाता है ।

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