देव वशीकरण यंत्र | वशीकरण धूप | वशीकरण काजल | शत्रु वशीकरण तंत्र | Dev Vashikaran Mantra | Vashikaran Dhoop | Vashikaran Kajal


देव वशीकरण यंत्र | Dev Vashikaran Mantra


विधि - बसन्त पंचमी के दिन दोपहर के पहले आक (मदार) की लकड़ी को पूरब की तरफ मुख करके तोड़ लावे और उसकी कलम बनाकर उस कलम से भोजपत्र पर इस यंत्र को लिखे | यदि कोई व्यक्ति अपने मस्तक (माथे) पर धारण करे तो देवता भी वश में हो जावें ।


वशीकरण धूप | Vashikaran Dhoop


मेषसिंगी, वच, खस, चन्दन, राल तथा छोटी इलायची, इन सबको बराबर-बराबर लेकर कूट-पीसकर, सब एक ही में रख ले, जब आवश्यकता पड़े तब अपने कपड़ों को इसी धूप से धूनी देकर वह कपड़े पहन कर यदि स्त्री के सामने जावे तो वह वश में हो तथा व्यापार के लिये जावे तो उसमें लाभ हो और राजा के पास जाने में राजा प्रसन्न हों ।

नोट - यह सब चीजें पुष्य नक्षत्र में लाकर उसी दिन कूट-छान कर रखनी चाहिये ।


वशीकरण काजल | Vashikaran Kajal


जिस दिन चन्द्रग्रहण हो उस दिन सफेद विष्णुक्रान्ता की जड़ को लाकर उसी दिन उसका अंजन (काजल) बनाकर आँखों में लगाने से निस्सन्देह प्रत्येक व्यक्ति, स्त्री-पुरुष यहाँ तक कि पशु-पक्षी तक मोहित होते हैं ।


दास बनाने का मंत्र


बसन्त ऋतु में पुष्य नक्षत्र में उल्लू पक्षी तथा बकरे का मांस (दोनों माँस) लगभग १ रत्ती के पानी में मिलाकर जिसे पिला दिया जावे वह जन्म-जन्मातर उसका दास रहेगा ।


शत्रु वशीकरण तंत्र


१. शनिवार को पुष्य नक्षत्र में लालचन्दन से भोजपत्र पर अपने शत्रु का नाम लिखकर शहद में डुबा दें तो वह शत्रु वश में हो जावेगा ।

२. उल्लू पक्षी का विष्ठा छाँह में सुखा कर पान में रखकर शनिवार शत्रु को खिलावें तो वह वश में हो ।

३. सहदेई और ओगा के रस को त्रिलोह के पात्र में घोंटकर तिलक लगाकर शत्रु के सामने जाने से शत्रु वश में हो जाता है ।

४. पुष्य नक्षत्र या शनिवार के दिन सहदेई, ओंगा, भंगरा, अंकोल, वच, सफेद आक, इन सबका अर्क निकालकर त्रिलोह के पात्र में तीन दिन तक घोंटे और उसका तिलक लगाकर शत्रु के सामने जाने से वह वश में हो जावेगा ।


शत्रु वशीकरण मंत्र


ओम् नमो भगवते 'अमुकस्य' बुद्धि स्तम्भन शत्रु फट् स्वाहा ।

विधि - बसन्त ऋतु में कृष्णपक्ष की चतुर्दशी को जिस दिन शनिवार हो उस दिन श्मशान में जाकर शव (मुर्दा) की छाती पर काले रंग के वस्त्र पहन कर स्फटिक की माला से विधिवत् ग्यारह हजार मंत्र जपकर मन्त्र सिद्ध करके (मन्त्र में ‘अमुकस्य' की जगह शत्रु का नाम लेना चाहिये) फिर आक के पके पीले पत्ते और पीली सरसों से १०८ बार उक्त मंत्र द्वारा हवन करे तो शत्रु तत्काल वश में होवेगा और शत्रु की मति पलट जावेगी ।

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