अगिया बेताल का मंत्र | कार्य सिद्धि मंत्र | Agiya betal sadhana | Karya siddhi mantra

अगिया बेताल का मंत्र | कार्य सिद्धि मंत्र | Agiya betal sadhana | Karya siddhi mantra

अगिया बेताल का मंत्र | Agiya Betal Sadhana


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ओम् नमो अगिया बैताल वीर बैताल पैठो
सातवें पाताल लाव अग्नि की जलती झाल बैठ
ब्रह्मा के कपाल मछली चील कागली गूगल
हरताल इन बस्ता लैं चोलि न लै चलै तो माता
कालिका का आन शब्द साँचा पिण्ड काचा फुरो
मन्त्र ईश्वरो वाचा ।

होली की रात्रि में श्मशान में जाकर गूगुल, हरताल से हवन कर चील्ह, कागली तथा मछली के माँस का भोग लगावे और एक लाख बार मंत्र जाप कर सिद्ध कर ले, तत्पश्चात् जब प्रयोग करना हो तो २१ मिट्टी के ढेले लेकर २१ बार मन्त्र पढ़कर जिस स्थान पर डाल देवे वहीं अग्नि प्रज्वलित हो उठे ।

कार्य साधन मंत्र | Karya Siddhi Mantra


बिलमिल्ला रहमानिर्ररहीम गजनी सो चला।
मुहम्मदा पीर चला चला सवा सेर का तोसा खाय
अस्सी कोस का धावा जाय श्वेत घोड़ा श्वेत पलान
जापै चढ़ा मुहम्मदा ज्वान नौ सौ कुत्तक आगे चलै
नौ सौ कुत्तक पीछे चलै काँधा पीछे भात डाला
ध्याया चलै चालि चालि रे मुहम्मदा पीर तेरे सम
नहि कोई वीर हमारे चोर को ल्याव सात समुद्र
की खाई से ल्याव ब्रह्मा के वेद सों ल्याव काजी की
कुरान सो ल्याव अठारह पुराण सों ल्याव जाव
जाव जहाँ होय तहाँ सों ल्याव गढ़ा सों पर्वत सों
कोट सों किला सों ल्याव मुहल्ला गली सों ल्याव
कूचा सों चौहटा सों ल्याव सेतखाना सों ल्याव
बारह आभूषण सोलह सिंगार सो ल्याव काजल
कजराटो सों ल्याव मढ़ की मौंठ सों रोली मोली सों
हाट बाजार सों ल्याव खाट सों पाया सों नौ नाड़ी
बहत्तर कोण की घूमती बलाय को ल्याव हाजिर
करौ हाड़ हाड़ चाम नख शिख रोम-रोमसों ल्याव रे
ताइया सिलार जिन्द पीर मारतौ पीटतौ तोड़तौ
पछाड़तौ हाथ हथकड़ी पाँव बेड़ी गला में तौक
उलटा कब्जा चढ़ाय मुख बुलाय सोम खिलाय
कैसे हूँ लाव बिन लिये मत आव ओम् नमो आदेश
गुरु को ।

इस मन्त्र की किसी भी दिन शुभ मुहूर्त्त में गौ के गोबर का चौका लगा धूप, दीप, लोहबान की धूनी देकर १,००८ बार मन्त्र जाप कर सवा सेर लड्डू का भोग लगावे तो यह मन्त्र सिद्ध हो जाय । प्रयोग के समय सात दाना उर्द को लेकर २१ बार मंत्र पढ़कर मस्तक पर छोड़ दे तो कार्य सफल होता है ।

पसली झाड़ने (दूर करने) का मंत्र


हं मन्दिर के किनारे सुरहा गाय सुरहा गाय के
पेट में उच्छा बच्छा के पेट में कलेजा कलेजा के
पेट में डब डब कर उमा बढ़े दुहाई लेना लोना
चमारी की ।

उपरोक्त मन्त्र को होली, दीवाली की रात्रि अथवा ग्रहण के अवसर पर पवित्रतापूर्वक १००८ बार लोहबान की धूनी देते हुये जाप कर सिद्ध कर लेवे और जब प्रयोग की आवश्यकता हो तो एक सेर लकड़ी और उँगली के नाप की सात सीकें लेकर २१ बार मंत्र पढ़कर झाड़ने से पसली रोग से मुक्ति मिल जाती है ।

चोरी गया धन निकलवाने का मंत्र


ओम् नमो नाहर वीर, चलते तेग में तेरा सीर
बहता चलता थामे नीर, सोये अनपे लागे तीर,
ज्यों-ज्यों चालै नरसिंह वीर, चित्त चोर का धरै
न धीर, चोर का हाथ काँपै, सिर काँपै, छाती
थरावै, जहाँ धरै चुराया धन, तहाँ सूं हटन न
पावै, दुहाई गुरु गोरखनाथ की दुहाई चौरासी
सिद्धि की दुहाई पूरन पूतकी । शब्द साँचा पिण्ड
काचा फुरो मन्त्र ईश्वरो वाचा सत्य नाम आदेश
गुरु को।

इस मंत्र को सूर्य अथवा चन्द्रग्रहण के अवसर पर किसी सरिता के तट पर पीपल के नीचे बैठकर एक लाख बार जाप करके सिद्धि कर ले और प्रयोग के अवसर पर उत्तर दिशा की ओर मुख करके एक कांसे की कटोरी सामने रख, मन्त्र पढ़कर चावल मारने से कटोरी अपने आप चलने लगेगी और जिस स्थान पर धन रक्खा होगा वहीं जाकर रुक जायेगी ।

अनाज की राशि उड़ाने का मंत्र


ओम् नमो हकाँलौ चौसठ योगिन हकालौ बावन
वीर कार्त्तिक अर्जुन वीर बुलाऊँ आगे चौसठ वीर
जल बींध बल बींध आकाश बींध तीन देश की
दिशा बींध उत्तर जो अर्जुन राजा दक्षिण तो
कार्तिक बिराजै आसमान लौ वीर गाजैं नीचे
चौसठ योगनी विराजै वीर तो पास चलि आवै
छप्पन भैरो राशि उड़ावै एक बंध असमान में
लगाया दूजे बाँधि घर में लाया शब्द साँचा पिंड
काचा फुरो मन्त्र ईश्वरो वाचा ।

दीपावली की अर्द्धरात्रि को जंगल में जाकर नग्न होकर दस हजार बार उपरोक्त मन्त्र का जाप कर सिद्धि कर लेवे और जब प्रयोग करना हो तो रात्रि में मूसा की मींगनी लाकर सात बार मन्त्र से अभिमन्त्रित कर अन्न की राशि पर रख कर चला आये तो उसके पीछे ही समस्त अन्न राशि उड़कर चली आती है ।

सावधान – जितनी राशि आपको प्राप्त हो उसका आधा भाग दान अवश्य दें अन्यथा फलीभूत न होंगे ।

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