ईडाणा माता जी | Idana Mata Temple

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ईडाणा माता जी

Idana Mata Temple

“क्या है माँ के अग्निस्नान का रहस्य”

कहा जाता है कि चमत्कार वही होते है जहाँ विश्वास होता है, और जहाँ विश्वास होता है वहाँ भगवान स्वयं चमत्कार दिखाते है। धर्म और आस्था में कई ऐसे चमत्कार होते है, जिनसे भगवान मे श्रद्धा और भी बढ़ जाती हैं।

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वैसे तो देशभर में अनेक देवी-देवताओं के मंदिर है, जहाँ अलग-अलग चमत्कार होते हैं और हर चमत्कार की अपनी एक अलग कहानी है, परंतु राजस्थान के मेवाड़ स्थित देवी मंदिर के चमत्कार की कहानी सबसे अनूठी है। जहाँ देवी माँ स्वयं अग्नि स्नान करती हैं।

ईडाणा माता का मंदिर


देवी का यह अनूठा मंदिर राजस्थान के उदयपुर से ६० किमी. दूर अरावली की पहाड़ियों के बीच गाँव बंबोरा मे स्थित मेवाड़ का प्रमुख शक्तिपीठ है। जिसे मेवाड़ की ईडाणा माता जी मंदिर के नाम से जाना जाता है।

मेवाड़ स्थित माता ईडाणा का यह मंदिर अपने अद्भुत चमत्कार की वजह से भक्तो के बीच आस्था का केंद्र बना हुआ है।

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ईडाणा माता अग्नि स्नान


कहाँ जाता हैं कि यहाँ माता स्वयं ही अग्नि स्नान करती हैं, अर्थात माँ के इस मंदिर में महीने में २-३ बार स्वतः अग्नि प्रज्वलित होने लगती हैं| इस प्रज्वलित अग्नि की लपटे इतनी भीषण हो जाती हैं कि, जो संपूर्ण माता के मंदिर को घेर लेती है| अग्नि की इन लपटो मे माता के श्रृंगार के साथ-साथ संपूर्ण मंदिर समाहित हो जाता हैं, परंतु माँ की प्रतिमा पर एक आंच तक नही आ पाती|

माता ईडाणा के इस अग्निरूपी साक्षात चमत्कार की वजह से ही आज तक इस मंदिर के छत का निर्माण कार्य अधूरा है, और आज भी माता ईडाणा एक खुले मंदिर मे विराजमान हैं।

माता ईडाणा के इस मंदिर का नाम मेवाड़ की महारानी के नाम से प्रसिद्ध हुआ है। प्राचीन समय में मेवाड़ के राजा-राजवाड़े, ईडाणा माता को अपनी कुलदेवी के रूप मे पूजते थे।

ईडाणा माता मंदिर के चमत्कार


महाभारत काल से स्थापित इस मंदिर की सबसे बड़ी मान्यता यह है कि यहाँ लकवा ग्रस्त मरीजो का इलाज़ भी होता हैं। जहाँ इस आधुनिक युग में बड़े से बड़े चिकित्सक भी इस रोग को दूर कर पाने में असमर्थ हैं, वही माता के इस अलौकिक चमत्कार के सामने बड़े-से-बड़े रोग भी घुटने टेक देते है। कहाँ जाता हैं कि जो भी लकवा ग्रस्त रोगी यहाँ माँ के दरबार मे आता हैं, वह कुछ ही दिनों में स्वयं अपने पैरो पे चलकर घर जाता हैं। इसके साथ ही साथ इस मंदिर में त्रिशूल चढ़ाने की भी परंपरा है, भक्तो द्वारा अपनी मनोकामना पूर्ण होने पर इस मंदिर में त्रिशूल चढ़ाया जाता है।

माता ईडाणा के इस अलौकिक आश्चर्य जनक अग्नि-स्नान को देखने के लिए दूर-दूर से भक्तो का तांता लगा रहता है। मान्यता यह है कि जो भी भक्तजन माता रानी के इस अग्नि स्नान के दर्शन करता है, उनके जीवन से हमेशा के लिए दुखो का नाश हो जाता हैं और उन भक्तो की समस्त मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। माँ का यह चमत्कार वाकई अद्भुत और अविश्वशनीय है।

अनेक चमत्कारो को अपने अंदर समेटे हुए माता के इस मंदिर में नवरात्र के दौरान विशेष पूजा अर्चना की जाती हैं | जिसमे शामिल होने के लिए भक्तजन हर साल भारी संख्या मे यहाँ पहुँचते हैं।

माता ईडाणा का यह अग्नि स्नानरूपी चमत्कार “जिसका राज़ आज तक कोई नहीं जान पाया कि अग्नि जलती कैसे है” इस बात का प्रमाण है कि ईश्वर और उनका चमत्कार आज भी संपूर्ण ब्रम्हांड मे व्याप्त है।

आप जब भी राजस्थान जाएं तो माता ईडाणा के दर्शन ज़रूर करे।

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