इत्रस्की सभ्यता | Etruscans Civilization

इत्रस्की सभ्यता | Etruscans Civilization

इस बारे में इतिहासकार एकमत हैं कि रोमन सभ्यता इटली में पहले से ही रहने वाली एक अनार्य जाति इत्रस्की की सभ्यता से प्रभावित रही है । इसके बावजूद यूनानी तथा रोमन सभ्यता की अपेक्षा इत्रस्की सभ्यता के विषय में बहुत कम जाना जा सका है । इसका मुख्य कारण संबंधित साहित्य का अभाव है । केवल कुछ पुरातत्त्वीय अवशेषों से ही खोज-कार्य में मदद मिल सकी है ।

इस सभ्यता के जन्म के संबंध में दो मत हैं । हिरोडोटस के अनुसार इत्रस्की लोग अनाटोलिया के लीडिया नामक स्थान से पश्चिम की ओर बढ़े थे, जबकि हेलिकार्नास्स (Halicarnassus) के डायोनिसियस (Dionysius) के अनुसार इत्रस्की इटली के मूल निवासी थे । इतिहासकारों ने दोनों ही मतों को स्वीकार किया है । किन्तु दूसरे मत का आधार अधिक मजबूत है क्योंकि इत्रस्की जाति की कब्रों तथा इटली में ९वीं शताब्दी में बनी कब्रों में अत्यधिक समानता पायी गयी है ।

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इत्रस्की सभ्यता पर यूनान की छाप स्पष्ट दिखायी देती है । किन्तु अधिक गौर से देखा जाये तो ज्ञात होता है कि इत्रस्की जाति ने यूनानियों से प्रेरित होकर अपनी एक अलग और मौलिक सभ्यता का विकास किया । इस तथ्य की पुष्टि उच्च कोटि के बुचेरो (Bucchero) कला के काली मिट्टी के बर्तनों से हो जाती है । यही नहीं इत्रस्की जाति तथा यूनानी परस्पर कट्टर शत्रु भी थे । एक सामुद्रिक युद्ध में ५३५ ई.पू. में इत्रस्की जाति ने यूनानियों को पूरी तरह पराजित कर दिया तथा कौर्सिका (Corsica) से परे धकेल दिया ।

इत्रस्की सभ्यता के काल में प्रत्येक नगर की कला भिन्न प्रकार की थी । उनकी कला में एकमात्र समानता यह थी कि वे सभी कर्मठ तथा प्रसन्नचित व्यक्तियों को चित्रित किया करते थे । अलग-अलग स्थानों पर बने मकबरे भी अलग-अलग प्रकार के हैं । सरवेटेरी (Cerveteri) में बने मकबरे ठोस चट्टानों को काटकर बनाये गये हैं तथा इनकी ढलुआ छतें खंभों के सहारे टिकी हुई हैं ।

पोपुलोनिया (Populonia) में बने मकबरें पत्थर की चहारदीवारी के भीतर एक अर्द्ध गोलाकार स्तूप से ढके हुए मेहराबदार झरोखों से युक्त कमरों के समान है । जबकि टाराक्वीनियन (Taraquinian) के मकबरे चट्टान को काटकर आयताकार कमरों के समान बने हुए हैं, जिनमें जाने के लिए ढलवां मार्ग बनाये गये हैं । इन कमरों की दीवारों पर अनेक सुंदर तथा अर्थपूर्ण चित्र बने हुए हैं ।

इत्रस्की सभ्यता के मन्दिरों तथा नगरों की वास्तुकला अत्यंत प्रभावशाली है । साथ ही वे अभियांत्रिकी (Engineering) के क्षेत्र में भी बहुत उन्नत थे । उन्होंने नदियों पर पुल बनाने की अपेक्षा सड़कों के नीचे सुरंग खोदकर जलमार्ग बनाये ।

इत्रस्की सभ्यता के द्वारा रोमन सभ्यता को दिये गये महान योगदान के कारण इतिहास में इसका महत्त्वपूर्ण स्थान है । रोमन लोगों ने चौथी शताब्दी में उन्हें जीत लिया । इत्रस्की लोग इसलिये पराजित हो गये क्योंकि वे मिलकर शत्रु का सामना नहीं कर सके । देखा जाये तो रोमवासियों ने अपने जीवन तथा धर्म के क्षेत्र में इत्रस्की सभ्यता से बहुत कुछ सीखा । रोमन सभ्यता में जो कुछ गैर-यूनानी था, वह वस्तुतः इत्रस्की था । रोमवासी इस सभ्यता को इतना अधिक सम्मान देते हैं कि आज भी रोमवासी बड़े गर्व से इत्रस्की सभ्यता को अपना पूर्वज मानते हैं ।

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