पायथस (पाइथियास) | पाइथियास इतिहास | मार्सिले के पाइथियास | Pytheas of Massalia

पायथस (पाइथियास) | पाइथियास इतिहास | मार्सिले के पाइथियास | Pytheas of Massalia

ब्रिटेन पहुंचने वाला सर्वप्रथम खोज-यात्री पायथस (पाइथियास) था ।

पायथस (पाइथियास) का जन्म यूनान के मासीलिया नामक नामक स्थान मे हुआ था | मासीलिया को मारसीलेस (Merceilles)कहते हैं, जो अब फ्रांस में है ।

ईसा से लगभग ३२५ वर्ष पूर्व इस नौजवान ने अपना घर छोड़ने का निश्चय किया और यह देखने के लिए कि धरती पर क्या है, समुद्री यात्रा पर चल पड़ा । आज से २३०० वर्ष पूर्व जब कि समुद्री यात्रा के साधनों का लगभग अभाव ही था, इस साहसी यात्री की खोज-यात्रा निश्चय ही अत्यंत महत्त्वपूर्ण थी । उसने उन क्षेत्रों का पता लगाया, जो प्राचीन दुनिया के लिए बिलकुल अज्ञात थे । उसके समय में न तो कोई मानचित्र था और न ही कोई दिशा-सूचक (Compass)।

उस समय दिशा-ज्ञान के लिए पूर्ण रूप से सूर्य, चांद और तारों आदि पर निर्भर रहना पड़ता था । पायथस (पाइथियास) की यात्रा के समय में यूनान का उपनिवेश मासीलिया काफी महत्त्वपूर्ण और समृद्ध था । व्यापार के क्षेत्र में भी यह उपनिवेश काफी आगे था । व्यापार के क्षेत्र में इसका सबसे बड़ा प्रतिद्वंद्वी कार्थेज (Carthage) था । कार्थेज गालों ने दूसरे देशों के जहाजों के जिब्राल्टर से एटलांटिक टापुओं पर आने वाले रास्तों को रोक रखा था, इसीलिए मासीलिया के लोग इस बात के इच्छुक थे कि उत्तरी यूरोप से व्यापार करने के लिए किसी दूसरे रास्ते का पता लगाया जाए । इस उद्देश्य की पूर्ति के लिए उन्होंने पायथीज को यात्रा के लिए आर्थिक सहायता प्रदान की ।

इसे भी पढ़े :   कर्नल जिम कॉर्बेट | जिम कॉर्बेट का इतिहास | जिम कॉर्बेट कौन थे | Jim Corbett | Jim Corbett Tiger

पायथस (पाइथियास) एक समुद्री नाविक और व्यापारी तो था ही, साथ ही साथ उसे भूगोल और खगोल विज्ञान का भी अच्छा ज्ञान था । वह एक बहुत ही चतुर और बुद्धिमान व्यक्ति था और उसका दृष्टिकोण भी वैज्ञानिक था । उसे यह भली-भांति पता था कि उत्तर की ओर जाने पर दिनों की लंबाई बढ़ती जाती है । उसने अपनी यात्रा मासीलिया से पश्चिम की ओर शुरू की । चलते-चलते जब वह एटलांटिक पहुंचा तो उसने उत्तर की ओर मोड़ ले लिया । वहां से कॉर्नवाल (Cornwall) को पार करते हुए उसने ब्रिटेन की एक त्रिभुजाकार रास्ते में परिक्रमा की । निश्चय ही उसकी यह यात्रा अत्यंत साहसपूर्ण थी ।

ब्रिटेन के लोगों के विषय में उसने लिखा कि उनकी संख्या काफी थी और उनके बहुत से मुखिया थे । उन दिनों वे युद्ध में रथों का प्रयोग करते थे । वे जमीन से ऊपर उठी लकड़ी के खंभों पर टिकी झोपड़ियों में रहते थे । उसने यह भी देखा कि कॉर्नवाल के लोग शेष भागों में रहने वाले लोगों की तुलना में अधिक सभ्य थे क्योंकि उनका संपर्क विदेशी व्यापारियों से बना रहता था ।

पायथस (पाइथियास) के अनुसार ब्रिटेन की परिधि लगभग ६४०० कि.मी. थी । उसने मासीलिया और ब्रिटेन ने उत्तरी सिरे के बीच की दूरी का अनुमान १०५० मील आंका था जो वास्तव में ११२० मील है । उसने ज्वार-भाटों में भी यात्रा की और यह निष्कर्ष निकाला कि ज्वार-भाटों की गति पर चंद्रमा का प्रभाव पड़ता है । उसने यह भी पता लगाया कि ध्रुव-तारा एकदम उत्तरी ध्रुव के ऊपर नहीं है ।

इसे भी पढ़े :   राणा हमीर सिंह का इतिहास । Rana Hamir Singh Sisodia

पायथीज ब्रिटेन के टिन उद्योग से बहुत प्रभावित हुआ था । उसने आज से लगभग २००० वर्ष पूर्व ब्रिटेन में अयस्क (Ore) से टिन धातु प्राप्त करने की संपूर्ण प्रक्रिया देखी और यह भी देखा कि इस धातु को किस प्रकार भेजा जाता है । उसने ब्रिटेन के अधिकतर भागों की पैदल यात्रा की और उसके बाद फिर वह उत्तर की ओर समुद्री रास्ते से चल पड़ा ।

पायथस (पाइथियास) ने स्कॉटलैंड (Scotland) भी देखा । अपने घर वापस लौटने पर पायथस (पाइथियास) ने अपनी यात्राओं का विवरण लिखा । लेकिन दुसरे खोज-यात्रियों की भांति इसके द्वारा लिखी गयी बातों पर भी बाद वाले यात्रियों ने विश्वास नहीं किया । उनकी राय में जो कुछ भी पायथस (पाइथियास) ने लिखा था वह सब झूठ था ।

लेकिन आज यह माना जाता है कि पायथस (पाइथियास) ने जो भी लिखा, वह सब सत्य था । वास्तव में हमें उसका एक महान खोज-यात्री और भूगोल-शास्त्री के रूप में सम्मान करना चाहिए क्योंकि उसके सभी निष्कर्ष सत्य थे । आने वाली सदियां भी इस खोज-यात्री तथा उसके योगदानों को भुला नहीं पायेंगी ।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *