लपसी तपसी की कहानी (मारवाड़ी मे)

Lapsi Tapsi Ki Kahani (In Marwari)

एक डोकरी हो । बीक सात बेटा हा बवां आपस म घडी लडती ही। बडी केंवती म्हे ही म्हे रोटयां करु, छोटी केवती म्हे ही म्हे झाड़ू काडू । तीजा बोलती म्हे ही म्हे पाणी भरु । यान करता करता आपन में लडायां भोत होबा लागगी। एक दिन डोकरी बोली चार घड़ा पाणी बाबडी सूं तो म्हे ही भर देवू । थोड़ी घडी तो लखाई कम होई। डोकरी घडो लेर बावडी पर गई । तप्यो झोपड़ी बना रयो हो। नातणो उड़कर बीकी झोपड़ी पर पडग्यो । बेटा आया ओर पुच्छया आज माताजी सौध गया ? बवां बोली थाका माताजी पाणी न गया। बेटा बोल्या थे सात जण्या हो। सात घडा पाणी लावली तो पिंडो भरीज जावतो । डोकरो मां न पाणी न क्यू भेज्या ? बुढापा म डोकरीं पडजाई तो हाथ-पांव टूट जाई तो सेबा करणु पढी । बेटा मां न लावण सामा गया। हाथ म सोना का कडा खांदा पर पाणी को घडा बेटा डोकरी न हाथ पकड कर सामी सामी लाव । बवा दूर सु देखी घबरायगी । चाँदी की गिलास म गरम गरम दूध म बादाम पिश्ता घालकार डोकरी न दे दिया । डोकरी गट गढ पी लियो। जाडो जाडो फाणा बाटयो षनायो खूब बूरा की शक्कर घाली गाय को घी घाल्यो डोकरी चूरमो चूरर खा लियो । बेटी बोली मां भोजायां आज थारो लाड घणों कर ह । डोंकरी बोरलीं तप्यो झोपड़ी बनावता नातणिया उड़जाय, तप्या बिना इत्ता सुख कुण बताय ? तप्या न तप को फलीजो म्हान म्हाको कहाणी कथा को फल होइजो ।

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