सपनों से प्राण रक्षा | Save Life From Dreams


ये घटना है सन् १९१४ के अक्तूबर महीना की । प्रथम महायुद्ध समाप्त हो चुका था । इस युद्ध में लाखों लोग मारे गए थे तथा हजारों का पता नहीं था कि वे कहां हैं ? इन्हीं दिनों मसजरेंक (पौलैंड) के उच्चाधिकारियों के पास एक लड़की मैरिना आया करती थी तथा वह आग्रह करती थी कि वे उसके बॉय-फ्रेंड का पता लगाएं, जो महायुद्ध में एक सैनिक की हैसियत से शामिल हुआ था तथा जिसके बारे में पता नहीं था कि वह जीवित है या मारा गया ।

अधिकारी उसके बार-बार आने तथा अपने बॉय-फ्रैंड का पता लगाने के आग्रह को सुन-सुनकर तंग आ चुके थे । वे उलटे उसी से प्रश्न करते थे कि बताओ मैरिना ! तुम्हीं बताओ। हम उसे कहां ढूंढ़ें ?

इसके उत्तर में मैरिना एक सपने के बारे मे बताती, जो प्रायः वह देखा करती थी । अक्तूबर १९१५ में जब वह अगली बार उच्चाधिकारियों से आग्रह करने के लिए गई थी, उसी रात उसने सपना देखा कि उसका साथी एक अंधेरी सुरंग में रास्ता ढूंढ़ रहा है । घोर अंधकार है । अंधकार में रास्ता टटोलने के लिए उसके साथी ने मोमबत्ती जलाई तथा उसके बाद चारों ओर बिखरे पड़े मलबे को हटाने की कोशिश की । मलबा हटाते-हटाते वह थक गया । उसकी शक्ति जवाब दे गई । हार कर घुटनों के बल झुक गया तथा सिसकने लगा ।

मैरिना यह सपना कई बार देख चुकी थी । इस सपने का प्रत्येक दृश्य चलचित्र के दृश्यों की भांति उसे दिखाई देता । एक भी दृश्य में कहीं भी कोई भी परिवर्तन नहीं आता था ।

कुछ समय बाद उसके सपने में थोड़ा-सा परिवर्तन आया । अब वह देखती थी कि पहाड़ी है, उस पहाड़ी की चोटी के पास एक किला है । उस किले का बुर्ज टूटा हुआ है । वह टूटे हुए बुर्ज के मलबे तक पहुंचती है । वहां जाकर वह खड़ी होती है, तो मलते में से उसे अपने खोये हुए बाय-फ्रेंड स्टानी स्लोनिस की जानी-पहचानी आवाज सनाई देती है, जो मदद के लिए पुकार रहा है । यह आवाज उन पत्थरों के नीचे से आ रही थी । मैरिना ने मलवा हटाने की कोशिश की, पर मलबा था कि खत्म ही नहीं होता था । मलवा हटाते-हटाते वह बुरी तरह थक जाती है तथा निराश होकर हांफती हुई वापस लौटती है ।

इन निराशा के क्षणों में उसकी नींद टूट जाती है । अब मैरिना को पूर्ण विश्वास हो गया कि उसका बॉय-फ्रेंड अवश्य जीवित है तथा उसी सुरंग में कैद है, जिसे वह सपने मे देखती है । मैरिना पुलिस स्टेशन जाती, भूगोलवेत्ताओं के पास जाती, अन्य अधिकारियों के पास जाती, तब उन सबसे उस सपने में दिखाई देने वाले किले की आकृति बताती, किन्तु उसकी मदद करने में सभी अपने को असमर्थ पाते है । कारण कि पोलैंड में उस तरह के अनेक किले थे, जो महायुद्ध के बीच खंडहरों के रूप मे परिवर्तित हो चुके थे ।

लोग मैरिना से सहानुभूति प्रकट करते, पर कोई ठोस मदद नहीं कर पाता । अंत में सब ओर से निराश मैरिना स्वयं इस स्थान की खोज करने को निकल पड़ी । वह किसी अज्ञात शक्ति से प्रभावित होकर एक दिशा में चलती रही । उसे दृढ़ विश्वास था कि उसका बॉय-फ्रेंड उसे अवश्य मिलेगा ।

बॉय-फ्रेंड को खोज पाने की प्रबल इच्छा शक्ति लिए मैरिना २४ मई १९१६ को दक्षिणी-पूर्वी पोलैंड के जोयोना गांव की एक पहाड़ी पर पहुंची । उसने वहां ठीक सपने में दिखने वाले दृश्य देखे, तो वह खुशी से चिल्ला उठी, "खोज लिया मैंने स्टानी को, खोज लिया । यही वह स्थान है, जहां स्टानी जीवित मौजूद है।"

उसकी आवाज सुनकर वहां भीड़ एकत्रित हो गई । स्थानीय पुलिस भी आ गई । मैरिना के कथनानुसार लोगों ने पहाड़ी की एक गुफा का मलबा हटाना शुरू किया । कुछ मलबा हटाया गया, तो उस छेद में से एक मनुष्य की हलकी-सी आवाज आई । जल्दी-जल्दी पत्थर व मलवा हटाया गया । पत्थर हटाने पर एक प्रवेश-द्वार मिला, जिसमें से होकर एक खंडहरनुमा भवन में जाया जा सकता है । मैरिना व उसके साथी अंदर गए । एक कमरे में स्टानी पड़ा मिला । उसका शरीर हट्टियों का ढांचा मात्र रह गया था, उसे बाहर निकाला गया ।

उचित चिकित्सा के बाद वह स्वस्थ हो गया । उसने बताया कि जब शत्रु की गोलाबारी हो रही थी, तो वह उससे बचने के लिए इस सुरंगनुमा भवन में आकर छिप गया । इस बंद खंडहर में उसके पास कुछ मोमबत्तियां, पनीर, बियर व बिस्कुट थे । उसी के बल पर उसने देढ साल काटा । गुफा के बाहर लोगों ने पत्थर लगा दिए थे । उसे बाहर निकलने का रास्ता नहीं मिला । वह सदैव मैरिना को याद करता रहा । कभी वह ईश्वर से प्रार्थना करता, तो कभी मौत की आशंका से भयभीत हो उठता ।

टेलीपैथी व सपने से प्रेरणा लेकर ही मैरिना ने अपने बॉय-फ्रेंड को जीवित अवस्था में खोज निकाला ।


बीस करोड़ साल का मेढक | Twenty Million Year Old Frog


यह घटना वर्ष १८६५ में लीड्स, (इंग्लैंड) में उस समय देखी गई, जब मजदूर हार्टलपूल वाटरवर्क्स के निर्माण के लिए खुदाई कर रहे थे । खुदाई करते हुए मजदूर अचानक प्रकृति के एक अजूबे से मिले ।

खुदाई के दौरान जमीन से लगभग पच्चीस-तीस फीट नीचे चूने के एक भारी पत्थर को जब तोड़ा गया, तो उसके भीतर मौजूद खोखली जगह में से एक जीवित मेढक निकला । उस मेढक का आकार सामान्य से बड़ा था । आश्चर्य की बात यह थी कि जिस पत्थर के अंदर वह मेढक कैद था, उसकी आयु कम-से-कम बीस करोड़ साल की थी तथा उसमें कोई ऐसा रास्ता नहीं था, जहां से मेढक आक्सीजन तथा भोजन हासिल कर पाता ।

पत्थर के अंदर से निकाले जाने के बाद वह मेढक मात्र एक सप्ताह तक ही जिंदा रह सका था । पत्थर के अंदर मेढक के जीवित रहने के रहस्य को सुलझाने के लिए वैज्ञानिकों ने बाद मे प्रयोग भी किए थे ।

सबसे महत्वपूर्ण प्रयोग १८६७ में फ्रांसीसी महोदय सीगन ने कुछ किया था । उसने लगभग बारह मेढकों को प्लास्टर ऑफ पेरिस से बने हुए एक ब्लाक में रखकर उसको जमीन में गाड़ दिया था । बारह वर्ष के बाद जब सीगन ने ब्लाक को जमीन से बाहर निकाला, तो बारह में से आठ मेढक मर चुके थे, परन्तु चार जिंदा थे ।

बारह वर्ष तक वे चार मेढक स्वयं को कैसे जिंदा रख सके, विज्ञान तथा जीवशास्त्रियों के लिए अभी भी यह रहस्य है ।

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